बिहार में 24 घंटे में 40 बच्चे लापता, पुलिस के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, सबसे ज्यादा लड़कियां गायब
पटना:बिहार पुलिस के आंकड़ों ने बिहार में लापता बच्चों और मानव तस्करी को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य से लापता बच्चों में से 60 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं, जिन्हें अक्सर शादी, रोजगार या घरेलू काम के बहाने दूसरे राज्यों में तस्करी करके ले जाया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में औसतन प्रतिदिन 40 बच्चे लापता हुए। हालांकि, 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होने के कारण इन आंकड़ों में तेजी से वृद्धि हुई है।वहीं दूसरी ओर, ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल और विशेष अभियानों के जरिए पुलिस लापता बच्चों की त्वरित बरामदगी और पुनर्वास में जुटी हुई है।
बिहार में हर दिन गायब हो रहे 40 बच्चे
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में लापता बच्चों के कुल 14,699 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से लगभग 8,600 लड़कियां थीं। 2026 में, अकेले जून तक 10,577 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से लगभग 6,700 लड़कियां हैं। गरीब परिवारों की किशोर लड़कियां मानव तस्करी का सबसे आसान शिकार बन रही हैं।
शादी और नौकरी के नाम पर धोखा
लापता बच्चों, विशेषकर लड़कियों को, बंधुआ मजदूरी, जबरन शादी, यौन शोषण और भीख मांगने जैसे गंभीर अपराधों में धकेल दिया जाता है। हालांकि “गोल्डन आवर” के दौरान पुलिस कार्रवाई में देरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य हो गया है।
मिशन वात्सल्य और ट्रैकिंग सिस्टम
तमाम चुनौतियों के बावजूद, यह राहत की बात है कि आधुनिक तकनीक और पोर्टल की मदद से बच्चों को ढूंढने की गति में वृद्धि हुई है। बरामदगी के आंकड़े वर्ष 2025 में कुल 7,772 बच्चे (6,567 लड़कियां) बरामद किए गए और जून 2026 तक 5,232 बच्चे बरामद किए गए। पोर्टल से मिलान – ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल के माध्यम से देशभर में 6,857 बच्चों की खोज की गई, जिनमें से 4,273 बच्चों का सफलतापूर्वक मिलान हो गया है। विशेष सत्यापन विवाह के नाम पर अपहरण और मानव तस्करी के संदिग्ध मामलों का अलग से सत्यापन किया जा रहा है।
5 साल में 45 हजार बच्चों का किया पुनर्वास
बिहार में बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने और उनके सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए “ऑपरेशन तलाश” और “ऑपरेशन सवेरा” जैसे विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। 2021 से 2025 के बीच लगभग 45,000 बेसहारा, तस्करी का शिकार और लापता बच्चों का पुनर्वास किया गया है। इसके अलावा, सभी पुलिस थानों में “बाल केंद्र” स्थापित किए जा रहे हैं। (एजेंसी)

