रजत पदक पर मीराबाई चानू का कब्जा, दूसरे प्रयास के बाद ही तय हो गया मेडल
Asian Games 2026: जापान में चल रहे एशियाई खेलों के चौथे दिन की शुरुआत से पहले ही, बुधवार को खेल प्रेमियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय भारोत्तोलक मीराबाई चानू थीं। हालांकि सुबह के सत्र में विभिन्न स्पर्धाओं में तीन पदक जीते जा चुके थे, फिर भी मीराबाई की चर्चा एक अलग ही परिप्रेक्ष्य में हो रही थी। यह चर्चा 1998 के बाद से एशियाई खेलों में भारत के भारोत्तोलन में चले आ रहे सूखे से संबंधित थी। आम जनता से लेकर अभिजात वर्ग और यहां तक कि मीडिया में भी यह बहस चल रही थी कि क्या यह सूखा समाप्त होगा। हालांकि, मीराबाई चानू ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सूखे को समाप्त किया और इतिहास रच दिया। एक समय ऐसा भी आया जब अंतिम क्षणों में मीराबाई को तीसरी बार प्रयास करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। चलिए डिटेल से जानिए कि एशियाई खेलों में 28 साल के सूखे को खत्म करने के लिए मीराबाई चानू ने क्या रणनीति अपनाई, कैसे उन्होंने क्लीन एंड जर्क वर्ग में इंट्री के बाद रणनीति बदली और क्यों इस वर्ग में तीसरे प्रयास से पहले ही उनका रजत पदक पक्का हो गया!
स्नैच वर्ग में रहा यह स्कोर: दो-दो किलो की रणनीति
मीराबाई चानू ने रणनीतिक रूप से स्नैच वर्ग में अत्यधिक भार उठाने से परहेज किया और एक योजना के अनुसार आगे बढ़ीं। अपने तीनों प्रयासों में, मीराबाई ने प्रत्येक प्रयास में दो किलोग्राम भार बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने क्रमशः 83, 85 और 87 किलोग्राम भार उठाकर इस लक्ष्य को प्राप्त किया। 87 किलोग्राम के अधिकतम भार के साथ वह दूसरे स्थान पर रहीं।
इसलिए अपनाई क्लीन एंड जर्क में 4 किलो की रणनीति
जाहिर है कि क्लीन एंड जर्क वर्ग में एथलीट अधिक भार उठाते हैं। मीराबाई ने इस वर्ग में 107 किलोग्राम के सफल पहले प्रयास से शुरुआत की, फिर रणनीतिक रूप से अपने दूसरे प्रयास में चार किलोग्राम भार बढ़ाकर 111 किलोग्राम का भार उठाया। इससे यह स्पष्ट होता है कि डायना के पहले प्रयास में असफल होने के बाद मीराबाई चानू ने अपने पहले प्रयास के बाद केवल चार किलोग्राम भार क्यों बढ़ाया। (एजेंसी)

