‘संवाद और विकास का दिखा असर’: ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता पर बोले विदेश मंत्री जयशंकर, ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारत
नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसे वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया है। विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में आयोजित इस सम्मेलन में कुल 32 उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी ने सिद्ध कर दिया है कि भारत आज दुनिया के लिए संवाद और समाधान का अहम केंद्र है।
सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधिमंडलों का विवरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हुए।
वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी और शीर्ष नेतृत्व का तालमेल
विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय बात राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के स्तर पर व्यापक भागीदारी रही। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और यूएई के क्राउन प्रिंस समेत कई शीर्ष नेताओं ने इसमें व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की मौजूदगी में इन नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्कृष्ट समन्वय और परस्पर विश्वास देखने को मिला।
टकराव के दौर में साझी सहमति और आर्थिक स्थिरता
डॉ. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कई तरह के मतभेद और संघर्ष जारी हैं, फिर भी ब्रिक्स ने अहम मुद्दों पर सहमति बनाने में सफलता पाई। उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व के संकट पर सभी देशों ने शांति, स्थिरता, संप्रभुता के सम्मान और दीर्घकालिक समाधान का समर्थन किया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खाद्यान्न सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखने पर जोर दिया गया।
कई ऐसे नेता जो सामान्य परिस्थितियों में एक साथ मंच साझा नहीं करते, उन्होंने नई दिल्ली में बैठकर वैश्विक चुनौतियों पर सकारात्मक चर्चा की।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, दोहरे मापदंडों का विरोध
विदेश मंत्री के अनुसार आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख में ब्रिक्स देशों ने पूरी दृढ़ता दिखाई। सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य पूरी तरह अस्वीकार्य और अपराध है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई। सीमा पार आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को पूरी तरह खारिज करने की बात कही गई।
‘सुधार’ और ‘लचीलापन’: ग्लोबल साउथ का सशक्त मंच
डॉ. जयशंकर ने बताया कि सम्मेलन के दो प्रमुख स्तंभ ‘सुधार’ और ‘लचीलापन’ रहे। इसने विकासशील और अल्पविकसित देशों की प्राथमिकताओं, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और प्रौद्योगिकी पहुंच को अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।
विदेश मंत्री ने अंत में कहा कि कई हलकों में यह आशंका थी कि इतने तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में यह आयोजन सफल हो पाएगा या नहीं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद, कूटनीति और विकास’ के मंत्र ने इसे नई दिल्ली में पूरी भव्यता के साथ साकार किया। भारत ने एक बार फिर अपनी वैश्विक कूटनीतिक क्षमता और नेतृत्व का लोहा मनवाया है।

