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क्यों नहीं हिले उज्जैन के खड़े हनुमान? IIT इंदौर के एक्सपर्ट करेंगे वैज्ञानिक जांच

उज्जैन: मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन के अधिकारियों और इंजीनियरों, दोनों को ही उलझन में डाल दिया है। प्रशासन ने लगभग 170 साल पुराने ‘खड़े हनुमान मंदिर’ की मूर्ति को दूसरी जगह ले जाने की पूरी कोशिश की—यह मंदिर सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहा था—लेकिन क्रेन, JCB और दर्जनों मजदूरों की कड़ी मेहनत के बावजूद, मूर्ति अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली। दस दिनों तक नाकाम कोशिशों के बाद, अब प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है, बल्कि इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। आइए जानते हैं इस अनसुलझे रहस्य और IIT इंदौर की जांच से जुड़ी पूरी अपडेट।

आधुनिक मशीनें फेल, प्राचीन तकनीक का शक

जब मंदिर का ढांचा गिरने के बाद प्रशासनिक टीम ने मूर्ति को हटाने की कोशिश की, तो भारी-भरकम क्रेन और JCB भी बेअसर साबित हुईं। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह मूर्ति लगभग 1,000 साल पुरानी हो सकती है और इसे संभवतः प्राचीन ‘इंटर-लॉकिंग तकनीक’ का इस्तेमाल करके जमीन के काफी नीचे स्थापित किया गया था। इसके अलावा, यह मूर्ति मालवा क्षेत्र के बेहद मजबूत और भारी ‘बेसाल्ट पत्थर’ से बनी है। प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसलिए अब प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती से बच रहा है।

उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाले पुराने ‘खड़े हनुमान’ मंदिर से जुड़ी एक घटना।
क्रेन, JCB और मज़दूरों की तमाम कोशिशों के बावजूद मूर्ति अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिली।
विशेषज्ञों की एक टीम ने खास उपकरणों का इस्तेमाल करके मूर्ति की गहराई और बनावट की जांच करने में दो घंटे बिताए।
मालवा बेसाल्ट पत्थर से बनी इस मूर्ति के बारे में पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि इसे बनाने में 1,000 साल पुरानी ‘इंटर-लॉकिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
स्थानीय लोग इस देवता को ‘डॉक्टर हनुमान’ और इस जगह को ‘उज्जैन का एम्स’ मानते हैं। मूर्ति को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश का विरोध किया गया और साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया।

भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बने ‘डॉक्टर हनुमान’

जहां प्रशासन विकास कार्यों के लिए सड़क चौड़ी करने की चुनौती से जूझ रहा है, वहीं आम लोगों और भक्तों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। भक्तों का मानना ​​है कि यह सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है। लोगों का ऐसा मानना ​​है कि यहां बीमार बच्चों और अन्य लोगों के ठीक होने के लिए की गई प्रार्थनाएं जरूर पूरी होती हैं, इसीलिए इस देवता को ‘डॉक्टर हनुमान’ कहा जाता है।प्रतिमा के न हिलने की घटना को भक्त भगवान का संकेत मान रहे हैं, जबकि हिंदू संगठनों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर इसे हटाने का कड़ा विरोध किया है।

आगे क्या होगा? टिकी हैं सबकी नजरें

अब शहर की नजरें IIT इंदौर की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि क्या ‘खड़े हनुमान’ की मूर्ति को सुरक्षित रूप से मौजूदा जगह से नई जगह पर ले जाया जा सकता है, या फिर तकनीकी दिक्कतों की वजह से प्रशासन को सड़क चौड़ी करने की अपनी योजना में बदलाव करना पड़ेगा। इस बीच, यह जगह शहर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। (एजेंसी)

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