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दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी ने उठाए शिक्षा व्यवस्था और पीजी संस्कृति पर बड़े सवाल, एम्स ने की एक की मौत की पुष्टि

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के मोतीबाग स्थित सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला ‘हॉस्टल डेज़’ बॉयज पीजी इमारत ढहने की दुर्घटना ने देश की राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुखद हादसे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार और उच्च शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं को आड़े हाथों लिया है। वहीं, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने और दो घायलों की हालत बेहद नाजुक होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

एम्स का मेडिकल बुलेटिन: एक की मौत, दो गंभीर रूप से आईसीयू में

इमारत के मलबे से निकाले जाने के बाद घायलों को तुरंत एम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, कुल चार घायलों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से एक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा दो अन्य छात्रों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। हादसे के दौरान राहत कार्य में जुटा एक बचावकर्मी भी घायल हुआ था, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

“कॉलेज हॉस्टल न होने के कारण अमानवीय हालातों में रहने को मजबूर हैं छात्र”

घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और अपने बयान के जरिए शिक्षा संस्थानों के बुनियादी ढांचे पर करारा तंज कसा है। राहुल गांधी ने कहा, “सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था, अब हालात जानलेवा हो चुके हैं। देश के कॉलेज या विश्वविद्यालयों में अच्छे और पर्याप्त हॉस्टल न होने के कारण छात्र मजबूरन एक-एक कमरे और एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में अमानवीय परिस्थितियों में रहने को विवश हैं। हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।”

उन्होंने एनडीआरएफ (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस और तमाम बचाव दलों से अपील की है कि वे मलबे में फंसे अंतिम छात्र को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई कसर न छोड़ें। राहुल गांधी ने यह भी जानकारी दी कि कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ता ग्राउंड जीरो पर पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं और पीड़ित छात्रों व उनके परिवारों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। फिलहाल मलबे को हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम युद्धस्तर पर जारी है।

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