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भारत की आंतरिक सुरक्षा का नया युग: 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण, ‘भारत-पोल’ और कड़े कानूनों से अपराध पर निर्णायक प्रहार

गोवा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गोवा के डोना पाउला में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में आए बुनियादी बदलावों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि 2014 से पूर्व देश आतंकवाद, अनियंत्रित नक्सलवाद और पूर्वोत्तर के सशस्त्र संघर्षों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। बीते वर्षों में अपनाई गई रणनीतिक स्पष्टता और तकनीकी सुधारों के चलते आज भारत आंतरिक मोर्चे पर अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ स्थिति में है।

‘भारत-पोल’ से वैश्विक नेटवर्क ध्वस्त, 274 भगोड़े अदालतों के कटघरे में

विदेश भाग चुके आर्थिक अपराधियों, आतंकवादियों और ड्रग तस्करों पर हुई कार्रवाई का आंकड़ा रखते हुए गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के मध्य 36 विभिन्न देशों से 274 भगोड़ों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत वापस लाया गया।

इस प्रक्रिया को निर्बाध और तेज गति देने के लिए ‘भारत-पोल’ नामक विशेष तंत्र स्थापित किया गया है। यह व्यवस्था देश की 14 से अधिक केंद्रीय जांच एजेंसियों और सभी राज्यों की पुलिस को एक साझी डिजिटल रीढ़ से जोड़ती है। शाह ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिसों पर ठोस कार्रवाई हुई, जिसमें केवल चालू वर्ष में जुलाई 2026 तक 182 नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क और जब्त की जा चुकी हैं।

अनुच्छेद 370 के बाद कश्मीर में स्थिरता, नक्सलवाद अंतिम सांसों पर

जम्मू-कश्मीर के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के उपरांत घाटी में अलगाववादी प्रवृत्तियों पर पूर्ण विराम लगा है और आतंकी घटनाएं न्यूनतम स्तर की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि कभी तिरुपति से पशुपतिनाथ तक समानांतर व्यवस्था की बात करने वाला नक्सलवाद अब इतिहास बन चुका है; हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वहीं पूर्वोत्तर में 14 से अधिक शांति समझौतों के जरिए करीब 10 हजार युवाओं ने हिंसा का मार्ग त्याग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपनाया है।

नए कानूनों से सजा दर में उछाल, 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

गृह मंत्री ने तीन नए आपराधिक कानूनों के जमीनी क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए गोवा पुलिस की कार्यप्रणाली को सराहा। उन्होंने बताया कि नए कानूनी प्रावधानों के चलते गोवा में दोषसिद्धि दर (कनविक्शन रेट) 22 फीसदी से उछलकर 53.2 फीसदी तक पहुंच गई है, जिसके आने वाले समय में 70 फीसदी पार करने का अनुमान है। साइबर सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन ‘1930’ को जन-उपयोगी समाधान बताया गया।

नार्को-टेररिज्म पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि 2029 तक भारत को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार है। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य मुद्दा मानते हुए इसके वित्तीय स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई सिंडिकेट्स को जड़ से समाप्त करने का अभियान जारी रहेगा।

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