Janmashtami 2026 Date: 4 या 5 सितंबर कब है जन्माष्टमी? जानिए दुर्लभ संयोग, शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि
Janmashtami 2026: इस बार गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय एक ही दिन मनाएंगे कन्हाई का जन्मोत्सव, जानिए क्या है निशिता काल पूजा का सही समय।
Janmashtami 2026: सालों बाद जन्माष्टमी पर ऐसा अद्भुत और दुर्लभ संयोग बन रहा है जो आपकी हर मुराद पूरी कर सकता है! क्या आप जानते हैं कि इस बार व्रत किस दिन रखा जाएगा और बालगोपाल के अभिषेक का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त क्या है? क्लिक करें और जानें पूजा से जुड़ी हर खास बात जो आपको जरूर पता होनी चाहिए!
भाद्रपद महीने में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ शुरू हो चुकी हैं। इस साल शुक्रवार के दिन पड़ने वाली Janmashtami बेहद खास है क्योंकि सालों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 02:25 से शुरू होकर अगली देर रात 12:13 बजे तक रहेगी। उदय तिथि और उदयाकाल की मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर को ही रखा जाएगा और इसी दिन रात के शुभ मुहूर्त में कान्हा का जन्म पूजन संपन्न होगा। इस बार अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग का उत्तम संयोग भी बन रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त:
निशिता काल पूजा मुहूर्त: 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (अवधि: 45 मिनट)।
जन्मोत्सव, अभिषेक और आरती का श्रेष्ठ समय: रात 11:58 से 12:43 के बीच।
रोहिणी नक्षत्र प्रवेश: 4 सितंबर की देर रात 12:29 बजे से।
पूजा विधि:
व्रत रखने वाले जातक सुबह स्नान कर जल और तिल लेकर व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार रहें और संध्याकाल में भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र को झूले में विराजमान करें। मध्यरात्रि के शुभ मुहूर्त में बालगोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें, उन्हें नए वस्त्र, मुकुट और बांसुरी पहनाएं। इसके बाद भव्य आरती कर प्रसाद वितरित करें और अगले दिन पारण समय पर व्रत खोलें।

