भागीरथपुरा जलकांड: सीवेज मिला पानी बना 24 मौतों का कारण, अफसरों की लापरवाही उजागर
इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों की जांच के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग ने हाई कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। 600 पन्नों की इस रिपोर्ट में एक अहम बात सामने आई है कि पानी की सप्लाई में सीवेज की मिलावट इन मौतों की वजह थी। इस मामले में प्रशासन की भारी लापरवाही सामने आई है।
न्यायिक जांच में क्या हुआ बड़ा खुलासा?
रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक-सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी जांच पूरी कर ली है। पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को यह रिपोर्ट सौंपी गई थी। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन वकीलों के जरिए इसकी मुख्य बातें सामने आ रही हैं। आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की, जिनमें से 24 मौतें सीधे तौर पर सीवेज-दूषित पानी पीने से हुई थीं। बाकी 12 मामलों में पानी से कोई स्पष्ट संबंध स्थापित नहीं हो सका।
प्रशासनिक लापरवाही और पाइपलाइन की लेटलतीफी
जांच रिपोर्ट से यह भी पता चला कि पुरानी पानी की पाइपलाइन बदलने में देरी हुई थी। नर्मदा जल आपूर्ति लाइन के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी काफी समय तक रुकी रही। वकीलों के अनुसार, अगर पाइपलाइन समय पर बदल दी जातीं, तो स्वास्थ्य के इस गंभीर संकट और उससे हुई मौतों को रोका जा सकता था।
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर 600 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई।
जांच में 8 से 10 अधिकारियों को उनके गैर-जिम्मेदार रवैये के लिए दोषी माना गया है।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने रिपोर्ट के कई अहम दस्तावेजों का निरीक्षण किया है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
मुआवजा बढ़ाने और भविष्य के लिए सुझाव
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील मनीष यादव ने कहा कि रिपोर्ट में मुआवजा बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इस त्रासदी ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सवाल उठाया है कि जिम्मेदारी सिर्फ अधिकारियों पर ही क्यों तय की गई है। उनका तर्क है कि चुने हुए प्रतिनिधियों की भी जवाबदेही बनती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष यादव ने बताया कि रिपोर्ट में मुआवजा बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इस ट्रेजेडी के बाद से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया है कि केवल अधिकारियों पर ही जिम्मेदारी क्यों तय की गई, जबकि चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भी जवाबदेही बनती है।

