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सोन नदी के पानी पर 25 साल बाद बनी सहमति, बिहार-झारखंड ने MoU पर किए हस्ताक्षर

Son River Water Agreement: सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। नए समझौते के तहत, सोन नदी का 5.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी बिहार को और 2.00 MAF पानी झारखंड को आवंटित किया गया है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी समेत दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

25 साल पुराने सोन जल विवाद का हुआ समाधान

बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर पिछले 26 सालों से चल रहा विवाद सुलझ गया है। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद थे।

इस समझौते के तहत, बिहार को 5.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) और झारखंड को 2 MAF पानी आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे दक्षिण बिहार और झारखंड के पठारी और सूखा-प्रवण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में सुधार होगा। इससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, पेयजल संकट कम होगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही दोनों राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सहयोग, विश्वास और साझा विकास का नया अध्याय है।

25 साल से अटका था पानी का बंटवारा

साल 2000 में झारखंड के बनने के बाद, सोन नदी के 7.75 MAF पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद पैदा हो गया था। यह नदी पहले अविभाजित बिहार राज्य का हिस्सा थी। 1973 के बाणसागर समझौते के तहत, अविभाजित बिहार को सोन नदी के कुल 14.25 MAF पानी में से 7.75 MAF हिस्सा आवंटित किया गया था। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी के बंटवारे का समझौता नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग और साझा विकास का एक नया अध्याय है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल से बनी सहमति

मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 10 जुलाई, 2025 को रांची में आयोजित ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की 27वीं बैठक में इस विवाद को सुलझाने के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। इसके बाद तकनीकी और प्रशासनिक स्तरों पर लगातार बातचीत हुई और अब इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है।

सिंचाई-पेयजल और उद्योग को मिलेगा फायदा

इस नए समझौते से दक्षिण बिहार और झारखंड के पठारी और सूखा-प्रवण इलाकों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने, पीने के पानी का संकट कम होने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, यह दोनों राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

सोन-फल्गु नदी परियोजना को भी मिलेगी रफ्तार

यह समझौता एक जलाशय बनाने और सोन-फल्गु नदी-जोड़ परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ करता है, जिसका मकसद सोन नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे गया-जी समेत दक्षिण बिहार के कई इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। साथ ही, उम्मीद है कि फल्गु नदी में पर्याप्त पानी होने से पितृ पक्ष मेले के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए तर्पण और पिंड दान की रस्में पूरी करना आसान हो जाएगा। (एजेंसी)

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