रक्षा क्षेत्र में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा बदलाव! 3 लाख करोड़ के इस मास्टरप्लान से कैसे सुपरपावर बनेगा भारत?
नई दिल्ली। भारत अब रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता बनने की राह पर निकल पड़ा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक ऐसा ‘गेम-चेंजर’ फैसला लिया है, जो भारतीय रक्षा उद्योग की पूरी तस्वीर बदल कर रख देगा। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक को भारतीय रक्षा कंपनियों को सौंपने की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है।
क्या है रक्षा मंत्रालय का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’?
इस नए फैसले के बाद अब देश की योग्य प्राइवेट कंपनियां और MSME भी DRDO की तकनीक का इस्तेमाल कर मिसाइल सिस्टम का उत्पादन कर सकेंगी। कंपनियों को मिसाइल बनाने के लिए जरूरी योग्यता, सर्टिफिकेशन और कड़े नियमों को पूरा करना होगा। इसका सीधा मकसद मिसाइलों के प्रोडक्शन को तेज करना और सप्लाई चेन में भारतीय उद्योगों की जड़ें मजबूत करना है।
ड्रैगन और पाकिस्तान को मिलेगा करारा जवाब
भारत सरकार का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब पड़ोसी मुल्क चालबाजी से बाज नहीं आ रहे हैं।
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन की मदद से पाकिस्तान अपनी अंतरिक्ष और मिसाइल क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। पाकिस्तान ने महज 16 महीनों के भीतर 6 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं।
ऐसे में भारत का यह कदम दुश्मन देशों के सर्विलांस और सटीक हमले वाले नेटवर्क को काउंटर करने के लिए एक सीधा और कड़ा जवाब है।
3 लाख करोड़ का महा-लक्ष्य और भारत की उड़ान
साल 2024-25 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 1.54 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। भारत का रक्षा निर्यात भी इतिहास रचते हुए 23,622 करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में डिफेंस प्रोडक्शन को 1.75 लाख करोड़ और साल 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का महा-लक्ष्य रखा है।
DRDO की तकनीक प्राइवेट कंपनियों के हाथ में आने से यह तय हो गया है कि भारत अब अपने दुश्मनों को सिर्फ जवाब नहीं देगा, बल्कि हथियारों के ग्लोबल मार्केट में एक नया सुपरपावर बनकर उभरेगा।

