राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सावरकर मानहानि केस रद्द
Rahul Gandhi: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ लंबित एक निजी आपराधिक शिकायत की कार्यवाही को रद्द कर दिया। राहुल गांधी पर हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का आरोप था। राज्य सरकार ने कहा कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी नहीं थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि मंजूरी नहीं है तो मामला यहीं खत्म हो जाता है।”इसके बाद पीठ ने शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित सभी संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को वीर सावरकर के अपमान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की निचली अदालत द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार के इस बयान के बाद जारी किया कि उसने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं दी थी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
लखनऊ के वकील नृपेंद्र पांडे ने यह मामला दायर किया था। याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। आरोप यह था कि 17 दिसंबर, 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने वीर सावरकर को अंग्रेजों का नौकर और पेंशनभोगी बताया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को पहले से तैयार पर्चे बांटे गए थे, जिससे पता चलता है कि यह बयान सोच-समझकर तैयार किया गया था और इसका मकसद समाज में नफरत फैलाना था।
पहले लगाई थी अंतरिम रोक
लखनऊ की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन 4 अप्रैल, 2025 को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने समन रद्द करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को उनके गैरजिम्मेदाराना बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई, लेकिन एसीजेएम न्यायालय द्वारा जारी समन पर रोक लगाते हुए उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की। अब उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने समन रद्द कर दिया है।
राहुल को लगी थी कड़ी फटकार
25 अप्रैल, 2025 को हुई सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने राहुल गांधी को सावरकर पर दिए गए उनके बयान के लिए फटकार लगाई। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि राहुल की दादी ने सावरकर की प्रशंसा करते हुए एक पत्र लिखा था। इसी दौरान महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश वायसराय को लिखे पत्र में खुद को ‘आपका निष्ठावान सेवक’ कहने का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या इसके आधार पर कोई उन्हें भी अंग्रेजों का नौकर कह सकता है।
पहले सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर लगाई थी रोक
पिछले साल, राहुल गांधी की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हालांकि, उस समय न्यायमूर्ति दत्ता ने सावरकर के बारे में की गई टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया था कि क्या स्वतंत्रता सेनानियों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति दत्ता ने यह भी कहा था कि यदि भविष्य में ऐसी टिप्पणियां दोहराई गईं, तो न्यायालय राहुल गांधी के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकता है। शुक्रवार को हालांकि पीठ ने मामले को पूरी तरह कानूनी आधार पर समाप्त कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के कारण राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन समेत संबंधित कार्यवाही रद्द कर दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने राहुल गांधी की ओर से पैरवी की। (एजेंसी)

