अनिका के इलाज में खर्च होंगे 1 करोड़ रुपये, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य को मदद के दिए निर्देश
इंदौर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार से दुर्लभ बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2’ से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता को देखते हुए वित्तीय सहायता प्रदान करने का रास्ता खोजने को कहा।
10 करोड़ रुपए का है खर्च
इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने कहा कि एसएमए के उपचार के लिए आवश्यक इंजेक्शन की लागत लगभग 9.55 करोड़ रुपये है और केंद्र सरकार की एक योजना के तहत 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
आठ करोड़ रुपए जुटाए
याचिकाकर्ता के वकील चंचल गुप्ता ने अदालत को बताया कि विभिन्न गैर सरकारी संगठनों और धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा चलाए गए अभियानों के माध्यम से लगभग 8 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि वर्तमान में संबंधित संस्थाओं के पास है।
दिल्ली एम्स को राशि देने के लिए तैयार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को इन संस्थानों से संबंधित सभी प्रासंगिक विवरण और एक हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें यह कहा गया हो कि इंजेक्शन का बिल प्राप्त होने पर वे अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) नई दिल्ली को उपचार राशि का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। न्यायालय ने कहा कि इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी नोवार्टिस का बिल आवश्यक कार्रवाई के लिए एआईएमएस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
एक करोड़ रुपए की और है जरूरत
हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की 50 लाख रुपये की सहायता और क्राउडफंडिंग के माध्यम से जुटाई गई लगभग 80 लाख रुपये की राशि को मिलाकर भी 10 लाख रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इन विशेष परिस्थितियों में लड़की के इलाज के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का उपाय खोजे।
राज्य सरकार को भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा
एकल पीठ ने राज्य सरकार से लड़की के इलाज के लिए कुछ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया। हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई तक अन्य संगठनों और संस्थानों से अतिरिक्त धनराशि जुटाई जा सकेगी ताकि दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लड़की का इलाज जल्द से जल्द शुरू हो सके।
18 अगस्त को है अगली सुनवाई
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं, जिससे मांसपेशियों कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है। गौरतलब है कि ‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक विभिन्न क्रियाओं के लिए संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं। (एजेंसी)

