पटरियों पर ग्रीन एनर्जी का नया युग: साबरमती से शुरू हुई भारत की पहली LNG ट्रेन, समझिए इसके बड़े पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
अहमदाबाद। भारतीय रेल नेटवर्क को अत्याधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में रविवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक ट्रेन का शुभारंभ नहीं है, बल्कि देश को स्वच्छ ईंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने वाला ऐतिहासिक कदम है।
एलएनजी ट्रेन के परिचालन से देश को मिलने वाले मुख्य फायदे
पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए एलएनजी को एक क्रांतिकारी विकल्प माना जा रहा है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सुगम परिवहन
डीजल इंजनों के मुकाबले एलएनजी इंजन हवा में जहरीली गैसों का उत्सर्जन लगभग न के बराबर करते हैं। इसमें सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर का स्तर बेहद कम होता है, जिससे रेलवे ट्रैक के आसपास के घनी आबादी वाले शहरों की वायु गुणवत्ता में प्रत्यक्ष सुधार देखने को मिलेगा। यह भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगा।
विदेशी मुद्रा की बचत और डीजल से मुक्ति
भारत कच्चे तेल की भारी मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आयात पर निर्भर रहता है। रेलवे में एलएनजी और बिजली का दायरा बढ़ने से कच्चे तेल का आयात बिल घटेगा। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में रेलवे की डीजल खपत 293 करोड़ लीटर से घटकर करीब 108 करोड़ लीटर पर आ गई है। वर्ष 2030 तक इस खपत को पूरी तरह शून्य करने की योजना है, जिससे हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
किफायती संचालन और आसान रखरखाव
तरल प्राकृतिक गैस की कीमतें डीजल की तुलना में अधिक स्थिर और किफायती मानी जाती हैं। इसके इस्तेमाल से ट्रेनों के परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिसका अप्रत्यक्ष फायदा माल ढुलाई की लागत घटाने में मिलेगा। इसके साथ ही नए जमाने के इन इंजनों की कार्यक्षमता और आयु पारंपरिक इंजनों से बेहतर आंकी गई है।
1,472 करोड़ की योजनाओं से बदला साबरमती का स्वरूप
समारोह के दौरान गृह मंत्री ने साबरमती डिवीजन में 1,472 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। उन्होंने साबरमती के ऐतिहासिक महत्व का स्मरण करते हुए कहा कि पूज्य बापू ने इसी धरती से खादी, ग्रामीण विकास और सत्याग्रह के प्रयोग शुरू किए थे, और आज इसी पावन भूमि से स्वच्छ तकनीक का जनहितैषी प्रयोग शुरू हो रहा है।
उन्होंने बताया कि 1980 के दशक का साबरमती स्टेशन अब पूरी तरह बदल चुका है और यह मेट्रो, बस नेटवर्क और प्रस्तावित बुलेट ट्रेन जैसे आधुनिक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट का मुख्य केंद्र बन चुका है।
94 फीसदी स्वदेशी निर्माण और रेलवे का आधुनिकीकरण
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में तैयार हो रहे आधुनिक लोकोमोटिव में 94 प्रतिशत निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हो रहा है, जिसे बहुत जल्द शत-प्रतिशत स्वदेशी बना दिया जाएगा। उन्होंने डब्ल्यूएजी-12 इंजन की क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि 12,000 हॉर्सपावर का यह इंजन अकेले 600 ट्रकों के बराबर माल ढोने की क्षमता रखता है। देश में रेलवे ट्रैक का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है और एलएनजी जैसी आधुनिक तकनीकों के सहारे भारतीय रेलवे अब दुनिया के सबसे स्वच्छ और सक्षम रेल नेटवर्कों की श्रेणी में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

