बाबा महाकाल के दरबार में आसान हुए दर्शन, सावन के पहले सोमवार से बदला आरती का समय
Sawan First Somwar Ujjain: सावन के पहले सोमवार को उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालु रविवार रात से ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कतार में लग गए थे। इस विशेष अवसर को देखते हुए भस्म आरती का समय भी बदल दिया गया था और आरती सुबह 2:30 बजे शुरू हुई। मंदिर प्रशासन की बेहतरीन व्यवस्थाओं के कारण भारी भीड़ के बावजूद कई श्रद्धालु मात्र 40 मिनट में बाबा महाकाल के दर्शन कर सके।
भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बहुत विशेष माना जाता है। सावन के सोमवार का महत्व तो और भी अधिक होता है। यही कारण है कि रविवार रात से ही देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचने लगे थे। देर रात तक मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भस्म आरती के साथ-साथ बाबा महाकाल के दर्शन का भी लाभ उठाया।
भस्म आरती में शामिल हुए हजारों भक्त
सोमवार को सुबह 2:30 बजे भस्म आरती शुरू हुई। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से . बुकिंग कराया था, उनके अलावा बड़ी संख्या में अन्य भक्तों ने भी चलित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। आरती के दौरान मंदिर परिसर शिव भक्ति से सराबोर था। श्रद्धालुओं के “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सावन और भादौ महीना के लिए बदला भस्म आरती का समय
सावन और भादो के महीनों को ध्यान में रखते हुए, मंदिर प्रशासन ने 30 जुलाई से भस्म आरती और मंदिर खुलने के समय में बदलाव किया है। अब मंदिर सुबह 4:00 बजे के बजाय 3:00 बजे खुलेगा और भस्म आरती सुबह 5:00 बजे तक होगी। भस्म आरती का समय प्रत्येक सोमवार को सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था 7 सितंबर तक लागू रहेगी। इसके बाद, 8 सितंबर से मंदिर की व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की तैयारी से आसान हुए दर्शन
सावन सोमवार को भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की है। आम श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय के रास्ते प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि बड़े गणेश मंदिर के पास एक सुरंग के माध्यम से निकास की व्यवस्था की गई है। गेट नंबर 1 को उन श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित किया गया है जो जल्दी दर्शन करना चाहते हैं।
सिर्फ 40 मिनट में हो रहे बाबा महाकाल के दर्शन
भीड़ प्रबंधन की नई व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रवेश और निकास मार्गों को सुव्यवस्थित करने के कारण श्रद्धालुओं को अधिक देर तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। कई श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के बाद लगभग 40 मिनट में ही बाहर निकलते देखे गए। मंदिर प्रशासन का लक्ष्य एक सुगम और सुरक्षित दर्शन व्यवस्था बनाए रखना है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किये गए
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश द्वारों पर पीने के पानी, टिकट काउंटर और जूते रखने के स्टैंड की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। त्रिवेणी संग्रहालय, महाकाल महालोक प्लाजा, विक्रम टीला, गेट नंबर 1, हरसिद्धि स्क्वायर, मानसरोवर भवन और नीलकंठ प्रवेश द्वार सहित प्रमुख स्थानों पर जूते रखने के स्टैंड स्थापित किए गए हैं।
कांवड़ यात्रियों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था
श्रावण और भादो माहों में बड़ी संख्या में कांवड़ तीर्थयात्रियों के आगमन की संभावना को देखते हुए, उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कांवड़ तीर्थयात्रियों को हरसिद्धि चौक पर स्थित द्वार संख्या 1 और एक विशेष मार्ग से प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। उन्हें मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को जल चढ़ाने की अनुमति होगी। हालांकि, शनिवार, रविवार और सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कांवड़ समूहों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रमुख स्थानों पर पार्किंग की सुविधा
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इनमें श्री महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र के पास का खाली मैदान, मेघदूत वन पार्किंग, नीलकंठ पार्किंग, चारधाम पार्किंग, कर्कराज पार्किंग और कार्तिक मेला मैदान पार्किंग शामिल हैं। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी से पार्किंग की सुविधा मिलेगी। (एजेंसी)

