भोजपुर एनकाउंटर के 45 दिन बाद बड़ा खुलासा, भरत तिवारी मामले में STF जवान गिरफ्तार
Bihar News: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अहम जानकारी सामने आई है। बिहार पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में STF के एक जवान को गिरफ्तार किया है। भोजपुर जिले के पुलिस अधीक्षक ने इसकी पुष्टि की है। भरत तिवारी के परिवार का आरोप है कि आत्मसमर्पण करने के बाद भी पुलिस ने उन पर गोलियां चलाईं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मौत हो गई। हाल ही में उनके परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी।जबकि चिराग पासवान, प्रशांत किशोर समेत कई नेताओं ने भरत तिवारी के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की थी। भरत तिवारी एनकाउंटर बिहार समेत पूरे देश में चर्चा में रहा है।
45 दिन पहले हुआ था भरत तिवारी का एनकाउंटर
भरत तिवारी की एनकाउंटर 45 दिन पहले हुई थी। अब इस मामले में पहली कार्रवाई की गई है। खबर है कि भरत तिवारी पर पहली गोली चलाने वाले STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार ने राहत और संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हो गई है। भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर शुरू से ही पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, भरत तिवारी के परिवार का कहना है कि आज की गिरफ्तारियों से न्याय की उनकी उम्मीदें बढ़ गई हैं। आशा देवी ने कहा, “लेकिन हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मेरे बेटे की हत्या के सभी दोषियों को फांसी नहीं हो जाती।” अपने बेटे की हत्या के बाद से ही उनका परिवार सरकार और अदालत से सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मौत की सजा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार, लगभग डेढ़ महीने बाद हुई यह कार्रवाई परिवार के लिए राहत की बात है।
सीएम सम्राट से मिले थे परिवार
हाल ही में, भरत तिवारी की माता आशा देवी, पिता काशीनाथ तिवारी और परिवार के अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। परिवार ने मुख्यमंत्री से न्याय की मांग की। इसके बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में यह गिरफ्तारी जांच में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार और तत्कालीन एसडीएम संजीव कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरेंडर के बाद गोली मारने का आरोप
दरअसल, भरत तिवारीएनकाउंटर के मामले में उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने गोलियां चलाईं। अक्षय कुमार ने पहली गोली चलाई, जिसके बाद घटनास्थल पर ही उन्हें तीन और गोलियां लगीं। मुठभेड़ की जांच के बादSTF जवान अक्षय कुमार को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाया गया।लेकिन अब पुलिस ने उसे आरा से गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि जिस वक्त भरत का एनकाउंटर हुआ था। उस वक्त वह फेसबुक पर लाइव थे। ऐसे में इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। जो जांच में अहम साबित हुआ था।
भरत तिवारी बिहार के भोजपुर निवासी 26 वर्षीय युवक थे। वे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक मुद्दों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। 17 जून को पुलिस एनकाउंटर में उनकी मृत्यु हो गई। सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो सबूतों से उनके आत्मसमर्पण का पता चलता है, जिससे घटना की प्रकृति पर सवाल उठते हैं। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।(एजेंसी)

