झारखंड JPSC विवाद में रिटायर्ड IAS खियांग्ते पर CID का शिकंजा, आज होगी पूछताछ
Ranchi News: CID ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ के बाद, जांच एजेंसी ने अब आयोग के पूर्व चेयरमैन और रिटायर्ड IAS अधिकारी एल. खियांगते को मंगलवार (आज) पूछताछ के लिए बुलाया है। CID अधिकारी खियांगते से परीक्षाओं के आयोजन, नतीजे तैयार करने की प्रक्रिया, आउटसोर्स की गई एजेंसियों के चयन और कई प्रशासनिक फैसलों के बारे में पूछताछ करेंगे।14वीं सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य मामलों में धांधली के स्तर को खंगालने के लिए डिजिटल साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
छापेमारी के बाद खियांग्ते ने दिया इस्तीफा
JPSC में गड़बड़ियों का पता चलने के बाद, CID की एक टीम ने JPSC ऑफिस और कमीशन के पूर्व चेयरमैन खियांगते के रांची स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच की गई। इसके बाद, खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब तक हुई जांच में CID ने JPSC के अधिकारियों और कर्मचारियों, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी—TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL)—से जुड़े लोगों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।साथ ही उनसे अकेले और फिर बाद में आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की है।
14वीं जेपीएससी पीटी रिजल्ट के बाद हुआ बवाल
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) के नतीजे जारी होने के बाद, उम्मीदवारों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने OMR शीट, मूल्यांकन प्रक्रिया और नतीजों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। बढ़ते विवाद के बीच, राज्य सरकार ने जांच CID को सौंप दी, जिसके बाद JPSC ऑफिस और संबंधित एजेंसियों पर छापेमारी की गई।
सीआईडी को हर सहयोग करने को तैयार: खियांग्ते
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते ने 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि CID की जांच में कोई रुकावट न आए, इसलिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया। अब वह जांच एजेंसी को हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पारदर्शिता और युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए निष्पक्ष जांच ही सबसे अच्छा विकल्प है। अपना पक्ष रखते हुए खियांगते ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि TDPL एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी है।
अब तक परीक्षा उप नियंत्रक समेत 10 गिरफ्तार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर इस मामले की जांच शुरू होने के बाद से अब तक दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें खास तौर पर JPSC की परीक्षा नियंत्रक की पूर्व डिप्टी श्वेता वर्मा, TDPL के डायरेक्टर रामवीर सिंह, अभय कुमार तिवारी TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर जो बाद में BSO के तौर पर काम करते थे। TDPL के कर्मचारी मो. उस्मान और मो. एबाद, JPSC के कर्मचारी सोनू कुमार और इस मामले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी के सहयोगी अरविंद कुमार मंडल समेत दूसरे लोग शामिल हैं। (एजेंसी)

