‘सुपर एल नीनो’ का खतरा बढ़ा, भारत में सूखे के आसार, धान की खेती पर संकट
Super El Nino Latest Update: भारत में सूखे के साफ संकेत मिल रहे हैं और बारिश में कमी आने की भी आशंका है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने ग्लोबल क्लाइमेट को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि साल के आखिर तक ‘सुपर अल नीनो’ का असर देखने को मिल सकता है। भारत समेत कई देश इससे प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर खेती पर भी पड़ सकता है।
जानिए क्या होता है ‘सुपर एल नीनो’?
‘सुपर अल नीनो’ मौसम से जुड़ी एक प्राकृतिक घटना है। यह बहुत तेजी से विकसित होती है। इस घटना के दौरान, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है। यह सामान्य ‘अल नीनो’ का ही एक ज्यादा शक्तिशाली रूप है। यह तब होता है जब पूरब से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या अपनी दिशा बदल लेती हैं। इससे दुनिया भर में मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आते हैं। कई देशों में सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफान का खतरा बढ़ जाता है। भारत में इसका सबसे बड़ा असर मॉनसून पर पड़ता है। बारिश कम होने से खेती खासकर खरीफ की फसलों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे खेती से होने वाले उत्पादन में कमी आ सकती है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का भी खतरा रहता है और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
भारत में सूखे का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज के केवल 90% रहने का अनुमान है। यानी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। एक और चिंता की बात इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) है। IMD का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन में IOD न्यूट्रल रहेगा। आमतौर पर पॉजिटिव IOD एल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार ऐसा होने की संभावना नहीं है। इसलिए एल नीनो का प्रभाव और ज्यादा महसूस हो सकता है।बारिश के आंकड़े भी हालात की गंभीरता को दिखाते हैं। जून में, देश में ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) के मुकाबले 39% कम बारिश हुई। यह पिछले 126 सालों में पांचवां सबसे सूखा जून और पिछली सदी का तीसरा सबसे सूखा जून रहा। जुलाई में भी अब तक 19% कम बारिश दर्ज की गई है। कुल मिलाकर, पूरे देश में मॉनसून की कमी 23% तक पहुंच गई है।
खरीफ की बुआई और धान की खेती पर बढ़ा दबाव
कम बारिश का असर अब खेतों में साफ दिखाई दे रहा है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, अब तक 531.25 लाख हेक्टेयर जमीन पर खरीफ की फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है, जबकि सामान्य हालात में अब तक 549.36 लाख हेक्टेयर में बुआई हो जानी चाहिए थी। इससे पता चलता है कि बुआई में लगभग 3% की कमी है।
सबसे बड़ी चिंता धान की खेती को लेकर है। धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल है। हालांकि, मॉनसून में देरी और असमान बारिश के कारण कई राज्यों में धान की रोपाई पर असर पड़ा है। अब तक, इस सीज़न के लिए तय किए गए कुल रकबे के केवल एक-चौथाई हिस्से में ही रोपाई पूरी हो पाई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 9% कम है। अगर आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो इसका असर फसल के उत्पादन, किसानों की आमदनी और खाद्य आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसलिए, वैज्ञानिक लगातार मौसम की स्थितियों पर नजर रख रहे हैं। (एजेंसी)

