अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में आया बड़ा फैसला, 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद
Ahmedabad Blast Case: 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में एक अहम फैसले में, गुजरात हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा और 11 अन्य को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर मुहर लगा दी। साथ ही, दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दी गईं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
यह फैसला गुजरात हाई कोर्ट की एक स्पेशल बेंच ने सुनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाई कोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए एक स्पेशल बेंच बनाई थी। इस मामले में मार्च 2025 से नियमित सुनवाई चल रही थी। राज्य सरकार की मौत की सजा की पुष्टि करने की अर्जी और दोषियों की सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।
50 से अधिक की मौत 200 से ज्यादा घायल
26 जुलाई 2008 को गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुछ ही मिनटों के भीतर कई धमाके हुए। इन धमाकों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। ये धमाके बाजारों, बसों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में किए गए थे। जांच एजेंसियों ने इसे देश के बड़े आतंकी हमलों में से एक माना। लंबी जांच और मुकदमे के बाद, एक विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला
विशेष अदालत के फैसले के बाद, दोषियों ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की, जबकि राज्य सरकार ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए याचिका दायर की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और विस्तृत सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 38 दोषियों की फांसी की सजा को न्यायिक मंजूरी मिल गई है, जबकि 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा भी बरकरार रहेगी। हालांकि, दोषियों के पास अब भी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध है। (एजेंसी)

