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Satluj OTT Controversy: ‘नेहरू के भारत में मामला कोर्ट जाता…’ फिल्म ‘सतलज’ के बैन होने पर भड़के कुणाल कामरा, सेंसर बोर्ड को लिखा तीखा पत्र

Satluj OTT Controversy: बॉलीवुड अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलज’ (जिसका पूर्व नाम ‘पंजाब ’95’ था) को लेकर देश में एक बार फिर सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ी बहस छिड़ गई है। लंबे समय तक सेंसर बोर्ड की बंदिशों का सामना करने के बाद, इस फिल्म को पिछले शुक्रवार को बिना किसी कट-छांट के ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर चुपचाप रिलीज किया गया था। लेकिन महज 48 घंटे के भीतर, यानी रविवार शाम तक इसे प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी कड़ी में मशहूर और बेबाक कॉमेडियन कुणाल कामरा ने सीधे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरपर्सन प्रसून जोशी को एक खुला खत लिखकर तीखे सवाल दागे हैं।

“अल्पसंख्यक समुदाय की कहानी दिखाई तो भुगतना पड़ेगा”

सेंसर बोर्ड के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कुणाल कामरा ने पत्र में लिखा, “क्या आप हमें बता सकते हैं कि फिल्म ‘पंजाब ’95’ के लिए 127 कट क्यों सुझाए गए थे? इसी फिल्म को, जिसका नाम अब ‘सतलज’ कर दिया गया है, दो दिन से भी कम समय में एक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। जबकि CBFC का OTT प्लेटफॉर्म या इंटरनेशनल रिलीज पर कोई कानूनी अधिकार क्षेत्र नहीं है।”

कामरा ने फिल्म की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए आगे कहा, “यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की कहानी है, जिन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन के दस्तावेजी सबूत सामने लाए और इसके लिए अपनी जान गंवानी पड़ी। अगर दस्तावेजी तथ्यों पर आधारित फिल्म भारतीय दर्शक नहीं देख सकते, तो जनता को यह जानने का हक है कि ऐसा क्यों है? इससे फिल्म मेकर्स को सीधा संदेश जाता है कि अगर आप किसी अल्पसंख्यक समुदाय की महान हस्ती को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, तो आपको CBFC का कोपभाजन बनना पड़ेगा।”

‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ पर उठाए सवाल

कुणाल कामरा ने सेंसर बोर्ड के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कुछ चुनिंदा फिल्मों का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “पत्रकारों को सेंसर बोर्ड चलाने वाले लोगों से कड़े सवाल पूछने चाहिए। कुछ राजनीतिक रूप से संवेदनशील फिल्में आसानी से कैसे पास हो जाती हैं, जबकि दूसरी फिल्में सालों तक अटकी रहती हैं? ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द बंगाल फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों के लिए रेड कार्पेट बिछाया जाता है। धुरंधर 1 और 2 के लिए फूल बरसाए जाते हैं। किसी डायरेक्टर के करियर के चार साल की कमाई पर दावत उड़ाने में आखिर कैसा लगता है?”

“CBFC ने किया जसवंत सिंह खालरा का दोबारा अपहरण”

अपने पत्र के अंत में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कामरा ने लिखा, “नेहरू के भारत में, यह मामला कोर्ट में जाता। अगर फिल्ममेकर्स बिना सालों की रुकावट के उन लोगों की कहानियां नहीं दिखा सकते जो न्याय के लिए खड़े हुए, तो हम उन्हें किस तरह की फिल्में बनाने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं? ऐसा लगता है कि जसवंत सिंह खालरा का फिर से अपहरण हो गया है, और इस बार यह अपहरण CBFC ने किया है।”

क्या है फिल्म ‘सतलज’ की कहानी?

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने पंजाब के दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए 3 साल से ज्यादा समय तक सेंसरशिप की दिक्कतों का सामना करना पड़ा और अंततः इसे थियेटर्स के बजाय सीधे ओटीटी पर रिलीज किया गया था, जहां से भी अब इसे हटा दिया गया है। फिलहाल इस मामले पर ZEE5 या सेंसर बोर्ड की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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