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सिंधु जल समझौते पर पाक मंत्री का विवादित बयान, भारत को दी गीदड़भभकी

पाकिस्तान न्यूज : पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू करने से पहले ही सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया था। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा, क्योंकि सिंधु नदी पाकिस्तान के कई प्रांतों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। पाकिस्तान कई बार इस समझौते को फिर से बहाल करने के लिए गिड़गिड़ा चुका है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। भारत का इस मामले पर रुख साफ है कि पाकिस्तान को सिंधु नदी का पानी तब तक नहीं मिलेगा जब तक वो आतंकी गतिविधियों को जारी रखेगा। अब इस मामले पर एक पाकिस्तानी मंत्री ने भारत को गीदड़भभकी दी है।

“उन हाथों को काट देंगे जो हमारे पानी को रोकने की कोशिश करेंगे”

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान की पानी की सप्लाई को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। पानी को पाकिस्तान की “रेड लाइन” बताते हुए मलिक ने जोर देकर कहा कि कोई भी इसके साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता। मलिक ने भारत पर पानी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि भारत नदियों का पानी स्थायी रूप से नहीं रोक सकता, बल्कि सिर्फ कुछ दिन के लिए बाधा डाल सकता है, क्योंकि उसके पास पानी रोकने के लिए कोई स्थायी संरचना नहीं है। इसके साथ ही मलिक ने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान उन हाथों को काट देगा जो उनके पानी को छुएगा या रोकने की कोशिश करेगा।

सिंधु जल समझौता रद्द होने से पाकिस्तान पर पड़ा गंभीर असर

सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और खेती पर बहुत बुरा असर पड़ा है। पाकिस्तान की 80% से ज्यादा खेती पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर निर्भर है। पानी की कमी से गेहूं, चावल और कपास की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा का संकट और गहरा गया है। ऊर्जा क्षेत्र को भी ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की कई पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। साथ ही, देश में औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है और बेरोजगारी दर बढ़ी है।(एजेंसी)

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