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यूएन की चेतावनी, अल नीनो से गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की संभावना, दुनिया पर खतरा मंडराया

UN El Nino Alert: साल 2026 और 2027 में दुनिया में मौसम के बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान के आधार पर चेतावनी जारी की है कि इस साल बनने वाला ‘अल नीनो’ अब तक का सबसे शक्तिशाली हो सकता है। उनका कहना है कि मौसम की इस घटना के कारण दुनिया भर में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच सकता है, जिसके सीधे असर पानी की कमी से लेकर खेती-बाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों तक हो सकते हैं।

यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के अनुमानों पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के कारण दिसंबर 2026 तक मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान औसत से 5.4 डिग्री फ़ारेनहाइट (3 डिग्री सेल्सियस) तक बढ़ सकता है। कुछ अनुमानों में तापमान में 7.2 डिग्री फ़ारेनहाइट (4 डिग्री सेल्सियस) तक की बढ़ोतरी की संभावना भी जताई गई है।

क्या अल नीनो तोड़ेगा रिकॉर्ड?

अगर ईसीएमडब्ल्यूएफ का अनुमान सही साबित होता है, तो इस साल अल नीनो के कारण दुनियाभर में तापमान बहुत अधिक जाएगा। यह 2015-2016 और 1997-1998 के रिकॉर्ड बनाने वाले अल नीनो से कहीं अधिक शक्तिशाली होगा। बीते दो अल नीनो घटनाओं के समय नीनो 3.4 इंडेक्स में तापमान औसत से 4.1 डिग्री फारेनहाइट यानी 2.3 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम विज्ञानी और ग्लोबल वेदर राइटर बेन नोल ने बताया है कि अब करीब हर अनुमान 3 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है और कुछ अनुमान 4 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान दिखा रहे हैं। इस अनुमान से पता चलता है कि यह अभी तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो की तरफ से इशारा कर रहा है।

यूएन प्रमुख की दुनिया को चेतावनी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि सितंबर से पहले अल नीनो के बनने की संभावना 80 प्रतिशत है और नवंबर से पहले यह संभावना 90 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि आने वाले महीनों में 90 प्रतिशत निश्चितता के साथ अल नीनो आने वाला है। उनका कहना है कि दुनिया को इसे जलवायु संबंधी चेतावनी के तौर पर देखना चाहिए।

गुटेरेस ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि यह पहले से ही खतरनाक तौर पर गर्म हो रही पृथ्वी पर ज्यादा गर्मी बढ़ाएगा। उनका कहना है कि अल नीनो की स्थितियां गर्म होती दुनिया की आग में घी का काम करेंगी। इसका असर दूर-दूर तक फैलेगा और बेहद तेजी से सीमाओं को पार करेंगे। इसलिए एहतियाती कदम उठाना आवश्यक है। (एजेंसी)

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