क्या लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी टीएमसी सुप्रीमो Mamata Banerjee? इस दिग्गज सांसद को सीट खाली करने का मिला आदेश!
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में रोज़ नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। चुनाव में मिली हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जबरदस्त अंदरूनी कलह और असंतोष की खबरें छन-छनकर बाहर आ रही थीं। लेकिन अब जो सबसे बड़ा सियासी ट्विस्ट सामने आया है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। मीडिया गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर केंद्रीय राजनीति यानी लोकसभा में वापसी करने का मन बना रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस वक्त ममता बनर्जी को संसद भेजने की रणनीति और संभावनाओं पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है।
पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान की सीट से लड़ सकती हैं चुनाव!
सामने आ रही खबरों के मुताबिक, ममता बनर्जी को लोकसभा पहुंचाने के लिए बहारामपुर लोकसभा सीट को चुना गया है।
सीट खाली करने का आदेश: रिपोर्ट्स का दावा है कि बहारामपुर से टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान को यह सीट खाली करने के लिए कहा जा सकता है।
ममता लड़ेंगी उपचुनाव: यूसुफ पठान के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई इस सीट पर ममता बनर्जी उपचुनाव लड़कर लोकसभा का रास्ता तय कर सकती हैं।
आपको बता दें कि यूसुफ पठान ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को इसी बहारामपुर सीट पर हराकर बड़ा उलटफेर किया था। ममता बनर्जी का लोकसभा से बेहद पुराना नाता रहा है; वह इससे पहले 6 बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और साल 2011 में बंगाल की मुख्यमंत्री बनने तक संसद में बेहद सक्रिय भूमिका निभाती रही थीं।
TMC सांसदों और बड़े नेताओं में भारी नाराजगी
विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद टीएमसी के कई वरिष्ठ सांसद और राष्ट्रीय स्तर के नेता पार्टी की मौजूदा कार्यशैली से बेहद खफा बताए जा रहे हैं। कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से और खुलकर अपनी असहमति और बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं:
लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत: टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपनी ही पार्टी के फायरब्रांड सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनकी शिकायत सीधे लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से की है।
इन नेताओं ने भी उठाए सवाल: काकोली घोष के अलावा सुखेंदु शेखर राय और शांतनु सेन जैसे टीएमसी के कद्दावर नेताओं ने भी पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली और फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा में भी बढ़ीं मुश्किलें: 57 विधायकों ने की बगावत!
टीएमसी के लिए मुश्किलें सिर्फ दिल्ली या सांसदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर भी पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच गई है।
विपक्ष का नया नेता: चौंकाने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी के 57 बागी विधायकों ने एकजुट होकर पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुन लिया है।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रबिन्द्र बोस ने इस बागी समूह को आधिकारिक रूप से मान्यता भी दे दी। इसके बाद से टीएमसी के भीतर एक बड़ा विभाजन (फाड़) साफ तौर पर देखा जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का क्या कहना है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है। ऐसे में अगर ममता बनर्जी खुद लोकसभा में जाने का फैसला करती हैं, तो इसके पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं। पहला पार्टी के भीतर बढ़ रहे इस अभूतपूर्व असंतोष और बगावत को अपने प्रभाव से नियंत्रित करना, और दूसरा राष्ट्रीय स्तर पर खुद को मजबूत कर संगठन को एक नई दिशा देना। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक (Official) पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है।

