IIM इंदौर करेगा Vaibhav Suryavanshi के सक्सेस फॉर्मूले पर रिसर्च, 15 साल के ‘सिक्सर किंग’ के माइंडसेट का होगा स्कैन
Vaibhav Suryavanshi IIM Indore Research: महज 15 वर्ष की उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को हैरान करने वाले बिहार के वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) अब सिर्फ क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रहे। खेल जगत में तहलका मचाने के बाद अब वे कॉर्पोरेट और शैक्षणिक जगत के लिए भी अध्ययन का विषय बन गए हैं। देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM इंदौर) ने वैभव सूर्यवंशी के ‘सक्सेस फॉर्मूले’ पर एक विशेष केस स्टडी करने का फैसला किया है। इसके तहत उनके माइंडसेट, निर्णय लेने की क्षमता और टैलेंट मैनेजमेंट का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा।
खेल, मनोविज्ञान और प्रबंधन का अनोखा संगम
यह देश की पहली ऐसी मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी (Multi-disciplinary Study) होगी, जिसमें खेल विज्ञान, मनोविज्ञान (Psychology) और प्रबंधन (Management) के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर काम करेंगे। आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु रॉय के अनुसार, यह रिसर्च सिर्फ वैभव के क्रिकेट के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असल उद्देश्य उस पूरी प्रक्रिया को समझना है जिसके कारण एक इतनी कम उम्र का बच्चा दबाव की स्थितियों में भी अविश्वसनीय प्रदर्शन कर पा रहा है।
इस अध्ययन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
पारिवारिक और सामाजिक ढांचा: खिलाड़ी को तराशने में परिवार का त्याग और उनका समर्थन।
मानसिक मजबूती: बेहद कम उम्र में अत्यधिक दबाव को संभालने की क्षमता।
संस्थागत प्रशिक्षण: सही समय पर सही कोच और मार्गदर्शन का मिलना।
“प्रतिभा एक उपहार हो सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रदर्शन में बदलने के लिए सही मूल्य, संतुलित सोच, अनुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व आवश्यक होता है।” – हिमांशु रॉय, डायरेक्टर (IIM इंदौर)
क्या है Vaibhav Suryavanshi की सफलता का ‘एक्स-फैक्टर’?
करीब 5 फीट 7 इंच लंबे और 55 किलोग्राम वजन वाले वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज बैट स्पीड और शानदार टाइमिंग है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी असली ताकत उनके दिमाग में है।
0.3 सेकंड की निर्णय क्षमता: वैभव पिच पर गेंद की दिशा और गति को भांपने के लिए सिर्फ 0.3 सेकंड का समय लेते हैं। इतनी कम अवधि में सही शॉट का चयन करना उन्हें अन्य बल्लेबाजों से मीलों आगे ले जाता है।
डर से मुक्त मानसिकता: जब पूर्व दिग्गज राहुल द्रविड़ ने उन्हें संयमित होकर खेलने की सलाह दी, तो वैभव का आत्मविश्वास देखने लायक था। उन्होंने कहा कि “गेंदबाज को उनकी चिंता करनी चाहिए।” आउट होने के डर से मुक्त यही सोच उन्हें खास बनाती है।
वर्तमान में राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा उनकी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जबकि पूर्व कोच विक्रम राठौर भी उनके संतुलन की तारीफ कर चुके हैं। उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी इस नींव को मजबूत किया है।
प्रसिद्धि के ‘डार्क साइड’ पर भी रहेगा फोकस
कम उम्र में मिलने वाली बेशुमार दौलत, सोशल मीडिया का दबाव और करोड़ों फैंस की उम्मीदें अक्सर बड़े-बड़े खिलाड़ियों का करियर समय से पहले खत्म कर देती हैं। आईएम इंदौर की यह स्टडी इस ‘डार्क साइड’ पर भी फोकस करेगी। रिसर्च का मकसद एक ऐसा ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार करना है जो कॉर्पोरेट जगत को भी टैलेंट मैनेजमेंट का नया मॉडल दे सके, ताकि युवा प्रतिभाएं मानसिक थकान (Burnout) का शिकार न हों।
IPL 2026 में रचा इतिहास: क्रिस गेल का रिकॉर्ड ध्वस्त
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में जो किया, वह आज तक क्रिकेट इतिहास में कोई नहीं कर सका। उन्होंने इस सीजन में:
कुल रन: 16 पारियों में 48.50 की औसत से 776 रन बनाए।
स्ट्राइक रेट: 237.30 का तूफानी स्ट्राइक रेट।
शतक/अर्धशतक: 1 शतक और 5 अर्धशतक।
सिक्सर किंग: पूरे सीजन में 72 छक्के लगाए। उन्होंने क्रिस गेल के एक सीजन में सर्वाधिक 59 छक्कों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए उन्हें ऑरेंज कैप, मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP), सुपर स्ट्राइकर, सुपर सिक्सेस और इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन समेत कुल पांच बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया। अब यही अद्भुत सफर दुनिया के सामने एक केस स्टडी के रूप में आने वाला है।

