मेरिट छात्रों के साथ बड़ा “खेला”: पहले 85 बच्चों को IPL दिखाने का ऐलान, अब सिर्फ 10 को मिलेगा मौका
छत्तीसगढ़ में मेधावी छात्रों को सम्मान देने के नाम पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पहले सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से घोषणा की गई कि दसवीं और बारहवीं की मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले सभी 85 छात्रों को 10 मई को रायपुर में होने वाला IPL मैच दिखाया जाएगा। लेकिन अब अचानक आदेश बदलते हुए केवल 10 छात्रों को ही मैच दिखाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे मेधावी छात्रों के साथ “खेला” बता रहे हैं।
पहले बड़े वादे, फिर छोटा फैसला
3 मई को लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा था कि मेरिट सूची में आने वाले विद्यार्थियों को एक शिक्षक के साथ रायपुर भेजा जाए। आदेश में इसे सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य बताया गया था।
इस घोषणा के बाद छात्र काफी उत्साहित थे। कई विद्यार्थियों ने रायपुर आने की तैयारी शुरू कर दी थी। खासकर दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए यह मौका किसी सपने से कम नहीं था। उन्हें पहली बार आईपीएल मैच स्टेडियम में बैठकर देखने का अवसर मिलने वाला था लेकिन कुछ ही दिनों बाद पूरा मामला बदल गया।
अब सिर्फ 10 छात्र ही देख पाएंगे मैच
नए आदेश में कहा गया कि अब केवल 10 छात्रों को ही IPL मैच दिखाया जाएगा। इनमें 10वीं के 5 और 12वीं के 5 छात्र शामिल होंगे। बाकी 75 छात्र अब इस अवसर से वंचित रह जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, जिन छात्रों का चयन किया गया है, उनकी सूची संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है। बाकी छात्रों को बाहर कर दिया गया है।
छात्रों में नाराजगी, बोले- फिर घोषणा क्यों की?
फैसला बदलने के बाद छात्रों में निराशा और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है। कई छात्रों का कहना है कि जब सभी बच्चों को ले जाने की तैयारी नहीं थी, तो इतनी बड़ी घोषणा ही क्यों की गई? कुछ छात्रों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले उत्साह बढ़ाया गया और बाद में अचानक उम्मीदें तोड़ दी गईं। कई छात्र तो अपने परिवार के साथ रायपुर आने की योजना तक बना चुके थे।
टिकट व्यवस्था नहीं होने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा विभाग सभी 85 छात्रों के लिए आईपीएल टिकट की व्यवस्था नहीं कर पाया। शुरुआत में सभी मेरिट छात्रों को मैच दिखाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग को अपना ही आदेश बदलना पड़ा। अब सवाल यह उठ रहा है कि बिना पूरी तैयारी के इतनी बड़ी घोषणा आखिर क्यों की गई?
पहले हेलीकॉप्टर राइड, अब टिकट भी मुश्किल
पूर्व सरकार के समय मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले छात्रों को प्रोत्साहन राशि के साथ हेलीकॉप्टर राइड जैसी सुविधाएं भी दी जाती थीं। अब स्थिति यह है कि मेधावी छात्रों को आईपीएल मैच दिखाने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन सभी के लिए टिकट तक की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसी को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स सरकार पर तंज कस रहे हैं। लोगों का कहना है कि “मेधावी छात्रों का सम्मान” अब सिर्फ घोषणाओं तक सीमित होकर रह गया है।
अधिकारी बोले- आदेश का पालन कर रहे हैं
रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने कहा कि लोक शिक्षण संचालनालय से जो निर्देश प्राप्त हुए हैं, उसी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। विभाग से जिन छात्रों की सूची भेजी गई है, केवल वही विद्यार्थी मैच देखने जाएंगे।
सवालों के घेरे में फैसला
अब इस पूरे मामले ने सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेधावी छात्रों को पहले सपना दिखाना और फिर आखिरी समय पर फैसला बदल देना, लोगों को समझ नहीं आ रहा है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि सरकार बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहती है, तो केवल घोषणाएं नहीं बल्कि सही व्यवस्था भी होनी चाहिए। वरना ऐसे फैसले बच्चों का मनोबल बढ़ाने के बजाय उन्हें निराश ही करेंगे।

