रूसी तेल पर बदला अमेरिका का मूड, भारत को क्यों दिया 30 दिन का समय?
ईरान-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने से भारत को तेल संकट का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की विशेष छूट दी है. यह कदम वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि ईरान से आपूर्ति ठप हो गई है.
ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग का असर पूरी दुनिया पर सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है. तेल की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो चुकी है. यही वजह है कि अगले 30 दिन यानी जब तक कि हालात सामान्य नहीं हो जाते भारत ईरान के बजाय रूस से तेल की खरीदारी करेगा. इस बात की छूट भी अमेरिका की तरफ से दी गई है.
आम तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के तेल व्यापार को सीमित करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन अभी ईरान से जुड़ी जंग के कारण दुनिया के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा होने का खतरा है. इसलिए अमेरिका ने भारत को थोड़ी राहत दी है.
युद्ध के कारण बाजार की हालत खराब
ईरान और इजराइल के बीच 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत की हुई थी. धीरे-धीरे यह युद्ध बढ़ता ही जा रहा है. यही वजह है कि ईरान ने दुनियाभर को होने वाली तेल की सप्लाई को फिलहाल के लिए रोक दिया है. इसमें भारत भी शामिल है. भारत के पास भले ही कुछ हफ्तों का तेल अभी भी बचा हुआ है, लेकिन हालात को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से
भारत में हो सकती थी तेल की कमी
ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक अहम केंद्र है और यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है. भारत ज्यादातर दूसरे देशों से आने वाले तेल पर ही निर्भर है . ऐसे में अगर कुछ दिनों के लिए ही सप्लाई रोकी जाती है तो इसका सीधा असर देश की जनता पर पड़ सकता है.
रूस से तेल खरीदारी होगी तेज
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के चलते भारत ने रूस से तेल खरीद में कुछ कमी की थी. हालांकि पश्चिम एशिया में अचानक बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता बन गया है. ऐसे में एक बार फिर रूस से तेल की खरीदारी तेज होगी.

