स्लीपर बस हादसों पर सख्त हुई सरकार, अब सभी राज्यों को जारी किए नए दिशा-निर्देश
केन्द्र सरकार ने जैसलमेर-जोधपुर व कुरनूल-बेंगलुरु रूट पर जानलेवा स्लीपर-बस आग दुर्घटनाओं के बाद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है. राज्यों/UTs को रजिस्ट्रेशन व फिटनेस इंस्पेक्शन में AIS:052 और AIS:119 के साथ CMVR 1989 के रूल 62 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है.
देश के अलग-अलग हिस्सों में आय दिन बस हादसे सामने आते ही रहते हैं. दिल्ली-मुंबई से लेकर राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी इस तरह के मामले सामने आते हैं जहां बसों में फंसकर यात्रियों की जान गई हो. अब इसी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की तरफ से नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. इसके मुताबिक सभी राज्यों/UTs को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के रूल 62 के अनुसार रजिस्ट्रेशन के समय और फिटनेस इंस्पेक्शन के दौरान AIS:052 और AIS:119 का पालन करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है.
हादसों के बाद बसों में पाईं गईं कई खामियां
जैसलमेर से जोधपुर रूट पर स्लीपर कोच में आग लगने की घटना में, यह देखा गया है कि बस की लंबाई तय लिमिट से ज्यादा थी. इमरजेंसी दरवाजे मिनिमम साइज की ज़रूरतों को पूरा नहीं करते थे. पैसेंजर सीटों ने इमरजेंसी दरवाजे तक जाने में रुकावट डाली थी. दो रूफ हैच के बजाय सिर्फ़ एक रूफ हैच दिया गया था.
इसके अलावा रूफ लगेज कैरियर में सीढ़ी लगी थी. ड्राइवर केबिन में पार्टीशन था और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) 1989 की जरूरतों के अनुसार फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम नहीं लगाया गया था. इन बदलावों का पता राज्य सरकार के लोकल ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को गाड़ी के सर्टिफ़िकेशन के समय लग जाना चाहिए था.
बस ऑपरेटर छिपा रहे जानकारी
6 फरवरी, 2026 तक रजिस्टर्ड स्लीपर कोच की कुल संख्या 49,616 है. अब तक कुल 886 बस बॉडी बिल्डर्स को मान्यता दी जा चुकी है. कुरनूल बेंगलुरु रूट पर स्लीपर कोच में आग लगने की घटना में, यह देखा गया है कि बस के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में सिर्फ़ सीटिंग कैपेसिटी लिखी थी.
सरकार का मानना है कि यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया गया तो बस हादसों में होने वाली जानमाल की क्षति को काफी हद तक रोका जा सकता है. अब देखना होगा कि राज्यों की परिवहन एजेंसियां इन दिशा-निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं.

