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Chhattisgarh News: सरकार ने गोदामों की क्षमता नहीं बढ़ाई, मिलिंग बाद चावल खराब होने की आशंका

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Chhattisgarh News: पूरे प्रदेश के धान संग्रहण केंद्रों से फोर्टिफाइड चावल के लिए पिछले वर्ष नवंबर से 3 माह तक धान दिया गया। अब तक 45 लाख टन धान मिलर्स मिलिंग हेतु उठा चुके हैं।

Chhattisgarh News रायपुर।  फ़ूड कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (FCI) और नान के गोदामों में जगह नही होने की वजह से मिलिंग का चावल नही लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने चावल का आबंटन 42 लाख टन से बढ़ाकर 67 लाख टन कर दिया है। जबकि गोदामों की क्षमता पूर्ववत है।

पूरे प्रदेश के धान संग्रहण केंद्रों से फोर्टिफाइड चावल के लिए पिछले वर्ष नवंबर से 3 माह तक धान दिया गया। अब तक 45 लाख टन धान मिलर्स मिलिंग हेतु उठा चुके हैं। पर शेष लाखों टन धान एवं नया बना चावल रखने जगह कम पड़ रही है। दोनों के बाहर पड़े होने से खराब होने की आशंका पैदा हो गई है। जगह की कमी के चलते FCI व नान के गोदामों में मिलिंग का चावल नही लिया जा रहा है।

इस मामले में अधिकारियों का जवाब है कि सरकार ने इस बार चावल आवंटन 25 लाख टन बढ़ा दिया है। पहले 42 लाख टन था, जो बढ़ाकर 67 लाख टन कर दिया गया है। जबकि गोदामों की क्षमता नही बढ़ाई गई है। यह पूर्ववत ज्यों की त्यों है। उधर मिलर्स का जवाब है कि मिलिंग हो चुके 30 लाख टन फोर्टिफाइड चावल FCI द्वारा लेना अभी बाकी है। उनके यहां मीलों के गोदामों में भी अब जगह नही बची है।

पीडीएस सिस्टम में होगी दिक्कत

हालांकि मिलर्स यह भी कह रहे हैं कि FCI के गोदामों में उन्हें उसना चावल रखने की जगह मिल रही है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 140 लाख टन धान किसानों से खरीदा है। इसमें अरवा और उसना चावल मिलिंग किया जाना है। प्रदेश के तमाम मिलर्स FCI और नान को चावल देते हैं। नान जो चावल लेती है वह पीडीएस सिस्टम से संचालित होती है। इस तरह मिलिंग में देरी से पीडीएस के लिए चावल वितरण में भी दिक्कत हो सकती है।

राइस मिलर्स एसोसिएशन अध्यक्ष योगेश अग्रवाल का कहना है कि

उधर राइस मिलर्स एसोसिएशन अध्यक्ष योगेश अग्रवाल का कहना है कि धान मिलिंग के बाद 15 दिन के भीतर चावल जमा करने का नियम है। यदि ध्यान नहीं दिया गया तो अगले वर्ष खरीदी प्लस पीडीएस सिस्टम प्रभावित होगा। FCI के जीएम देवेंद्र यादव का कहना है कि अरवा चावल में दिक्कत हो रही है। आबंटन बढ़ने से चावल रखने में दिक्कत है। प्रयास किया जा रहा है, जिससे जून माह से रैक मिलना शुरू हो जाएगा।

(लेखक डा. विजय)

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