Gene Therapy: पहली बार जीन थेरेपी से सिकल सेल का इलाज शुरू, भारत में दो करोड़ से ज्यादा मरीज
Gene Therapy: वाशिंगटन (अमेरिका) के चिल्ड्रन नेशनल हॉस्पिटल में इन दिनों 12 वर्षीय बालक केंड्रिक क्रोमर का इलाज जीन थैरेपी से किया जा रहा है। यह बालक अरसे से सिकलसेल जैसी घातक बीमारी से जूझ रहा है।
Gene Therapy रायपुर। अमेरिका में इन दिनों एक मरीज जो सिकल सेल से पीड़ित है का इलाज जीन थैरेपी से किया जा रहा है। अगर यह पहला प्रयोग सफल रहा तो दुनिया भर के करोड़ों सिकल सेल पीड़ितों के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है।
सिकल सेल का इलाज जीन थैरेपी से
वाशिंगटन (अमेरिका) के चिल्ड्रन नेशनल हॉस्पिटल में इन दिनों 12 वर्षीय बालक केंड्रिक क्रोमर का इलाज जीन थैरेपी से किया जा रहा है। यह बालक अरसे से सिकलसेल जैसी घातक बीमारी से जूझ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार जीन थैरेपी महीनों चलती है। अगर बालक केंड्रिक क्रोमर पर यह पहला प्रयोग सफल होता है, तो चिकित्सकों को बड़ी कामयाबी सिकलसेल से निपटने या उसका इलाज करने में मिलेगी। फिलहाल बीमारी से ग्रस्त बालक न तो ठीक तरह से खेलकूद पाता और न आम बच्चों जैसी मस्ती। उसके लिए सर्दी में बाहर घूमना या सायकल चलाना भी दूभर था। वह असहनीय पीड़ा से गुजरते रहा। पिछले वर्ष उसका इलाज जीन थैरेपी से करने की अनुमति मिली। जिसके तहत शरीर में एक जीन और जोड़ा जाता है, जबकि दूसरी में पहले से मौजूद जीन में बदलाव किए जाते हैं।
ब्लूबर्ड बायो नाम की कंपनी का केंड्रिक क्रोमर पहला मरीज
ब्लूबर्ड बायो नाम की कंपनी का केंड्रिक क्रोमर पहला मरीज है। अमेरिका में इस वक्त 20 हजार से अधिक लोग सिकल सेल से ग्रसित हैं। चिकित्सकों ने केंड्रिक क्रोमर के बोन मैरो की स्टेम सेल्स निकाल दी है। इन्हें ब्लू बर्ड अपनी लैब में जेनेटिकली मॉडिफाई करेगी। इस प्रक्रिया के लिए केंड्रिक के लाखों-करोड़ों स्टेम सेल की जरूरत होगी। पहली बार में पर्याप्त स्टेम सेल नहीं निकली होंगी तो केंड्रिक के एक और स्टेम सेल एक्सट्रैक्शन के लिए महीनेभर में तैयारी करनी होगी।
भारत में दो करोड़ से ज्यादा मरीज
भारत में सिकल सेल के दो करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। इस आनुवंशिक बीमारी में लाल रक्त कणिकाओं का डिसऑर्डर हीमोग्लोबिन को प्रभावित करता है। लाल रक्त कणिकाएं आसानी से मूव नहीं कर पातीं और शरीर में खून का प्रवाह रोक सकती हैं। यह ताउम्र साथ रहने वाली बीमारी है। अब तक बोन मैरो ट्रांसप्लांट इसका एकमात्र इलाज था।

