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Chhattisgarh News : डीएमई का प्रस्ताव, वनांचल में काम करने वाले डॉक्टरों को मिलेगा उच्च वेतनमान

Chhattisgarh News :

Chhattisgarh News : राज्य के सुदूरवर्ती अनुसूचित क्षेत्रों में राज्य सरकार ने MBBS पाठ्यक्रम के लिए मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल की स्थापना की है।

Chhattisgarh Newsरायपुर। प्रदेश के दूर-दराज अनुसूचित क्षेत्रों में राज्य सरकार ने MBBS पाठ्यक्रम वास्ते चिकित्सा महाविद्यालय कम अस्पताल स्थापित किया था। जहां के शिक्षकों को अच्छा वेतनमान वह भी दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस ) के पीजी इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

दरअसल, हम चर्चा कर रहें हैं। 14 बरस पूर्व बस्तर स्थित जगदलपुर में खोले गए चिकित्सा महाविद्यालय कांकेर में 3 वर्ष पूर्व एवं कोरबा में दो बरस पूर्व चिकित्सा महाविद्यालय खोलने का बड़ा मकसद था। वहां अच्छी चिकित्सा को आसानी से पहुंचना। क्षेत्र के लोगों को दौड़-भाग कर इलाज वास्ते रायपुर, बिलासपुर आने के खर्चे झंझट से बचाना। साथ ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई हेतु यानी प्रदेश में ज्यादा तादात में चिकित्सक तैयार करने अध्यापन व्यवस्था या महाविद्यालय खोलना राज्य शासन ने तो अच्छा कार्य अनुसूचित इलाके के तौर पर कर दिया था।

पर चिकित्सक या मेडिकल कालेज में पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक रीडर, प्रोफेसर तीनों जगह जाना लंबे अरसे तक रहना या स्थायी रूप से रहना पसंद नही करते रहें हैं। इसके पीछे बड़ी वजह उक्त जगहों का रायपुर से छोटा होना। सुख- सुविधाओं भौतिकतावाद का काम होना। रायपुर, बिलासपुर में रहकर नौकरी के साथ प्रायवेट प्रैक्टिस कर अच्छी खासी कमाई यहां के डॉक्टर कर लेते हैं, जो वेतन से दुगुना तिगुना होता है। ऐसी स्थिति में यहां से (रायपुर) दूर अंचल नही जाना चाहता। अपने स्तर या समकक्षों का न होना या घूमने-फिरने के लिए माल, हाट- बाजार कम होना आदि या अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल कालेज (अंग्रेजी) का न होना।

फैकल्टी की कमी के चलते तीनों नए कई कालेजों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होते रही है। फैकल्टी की कमी से इन्हें मान्यता लेने में सीधे तौर पर बाधा आ रही है। इसलिए इस समस्या से निपटने डीएमई ने उक्त तीनों स्थानों यानी जगदलपुर, कांकेर, कोरबा चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों ‘रीडरों प्रोफेसर के डीकेएस रायपुर सीजी इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर से अधिक वेतन देने के लिए प्रस्ताव कर शासन को भेजा है। जिसका एकमात्र उद्देश्य वहां फैकल्टी पर्याप्त कर उन्हें रोकना है।

डीएमई के अनुसार तीनों स्थानों पर फिलहाल सहा प्राध्यापक को 95 हजार से 1 लाख 15 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर को 1लाख 55 हजार से 1 लाख 60 हजार। प्रोफेसर को 1लाख 90 हजार मिल रहा है। जिसे बढ़ाकर सहायक प्राध्यापक 1 लाख 40 हजार से 1लाख 50 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर को 2 लाख से 2 लाख 10 हजार एवं प्रोफेसर को 2 लाख 4 लाख 40 हजार से 2 लाख 50 हजार तक देने का प्रस्ताव भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार आलाअधिकारियों का मानना है कि या स्पष्ट राय है कि डीकेएस एवं जवाहर मेडिकल कालेज के डाक्टरों का वेतन नही बढ़ाया जाएगा। क्योंकि यहां नौकरी कर रहे डाक्टरों की प्रायवेट प्रैक्टिस अच्छी खासी होती है। अतः वेतन बढ़ाने की जरूरत नहीं है। तात्कालीन हेल्थ सेक्रेटरी ने तो यहां तक कह दिया था कि जिन्हे ज्यादा वेतन चाहिए वे इस्तीफा देकर दूसरा कालेज ज्वाइन करे।

(डा. लेखक विजय)

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