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Chhattisgarh News: भीषण गर्मी के चलते प्रदेश के बांधों में जल गिरा स्तर, औसतन 10% पानी

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Chhattisgarh News: प्रदेश के अंदर कई बांधों (जलाशय) के जल स्तर का मौजूदा आंकड़ा भयावह हालातों की तरफ संकेत दे रहा है।

Chhattisgarh News रायपुर। प्रदेश के अंदर कई बांधों (जलाशय) के जल स्तर का मौजूदा आंकड़ा भयावह हालातों की तरफ संकेत दे रहा है। बीते 2 वर्षो की तुलना में इस बरस बड़े बांधों में जल भंडारण सबसे कम स्तर पर आ गया है। गर्मी बढ़ने के साथ महज 25 दिनों में कुछ बांधों में 2 से 10% तक जलस्तर (भंडारण) कम हो गया है।

गौरतलब हो कि मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तेज गर्मी के चलते कई हिस्सों के तालाबों, बांधों पर प्रभाव पड़ा। 26 मार्च के बाद से अब तक आधा दर्जन से अधिक बांधों में जल भंडारण 5 से 13% कम हो गया है, तो वही सैकड़ों तालाबों में जल एक तिहाई से एक चौथाई रह गया है। गांवों में निस्तारी के लिए जल की कमी को देखते हुए गंगरेल समेत कई बांधों से कुछ दिनों पूर्व पानी छोड़ना पड़ा था।

बांधों में 10 फीसदी पानी बचा है

जल संसाधन विभाग के सामने व्यापक चुनौती आ गई है। उन्हें पेयजल हेतु स्टाक सुरक्षित रखना है, तो दूसरी ओर जरूरी उद्योगों को नियमतः जल आपूर्ति करनी है, तो उधर विभिन्न जिलों से निस्तारी के लिए दबाव बढ़ते ही जा रहा है। जिन्हें बांध से पानी छोड़कर राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया। लिहाजा, जलस्तर घट रहा है। जानकारों के अनुसार निस्तारी के लिए जल की मांग बनी रही तो मई माह में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। पखवाड़े भर के अंदर गंगरेल बांध में 6% गिरावट आई है। अरपा भैंसाझार 18% समेत मुरुमसिल्ली में 16% अन्य बांधों में भी 10 से 14 फीसदी तक औसतन गिरावट देखी जा रही है।

प्रदेश के सभी बांधों का जलस्तर घट गया है

जिन बड़े-मंझोले जलाशायों (बांधों में) जल स्तर घटा है। उनमें क्रमशः मिनी माता कांगो, गंगरेल बांध, तांदुला बांध, दुधवा बांध,सिकासार बांध,खारंग जलाशय,सोंढुर जलाशय, मुरुमसिल्ली, कोडार, मनियारी, केलो आदि शामिल हैं। उधर कहा गया है कि जब भी बांधों से निस्तारी वास्ते पानी छोड़ा जाए तो उसकी सतत निगरानी है। ताकि पानी व्यर्थ न बहे। गांव वाले बहुत परेशान है। तालाब सूख रहे हैं, तो पशुधन के लिए पानी कम पड़ रहा है। वहां बोरवेलों की संख्या भी कमतर है। जानकारों के अनुसार अगर मई बाद जून में15 -20 तारीख तक अगर भीषण गर्मी पड़ी या मानसून भी देर से अगर आया तो स्थिति भयावह हो जाएगी।

(डा. लेखक विजय)

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