Supreme Court to Patanjali: बाबा रामदेव पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, अवमानना का नोटिस देकर किया तलब जस्टिस और
Supreme Court to Patanjali:
Supreme Court to Patanjali: पतंजलि की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस पर कहा कि कानून का उल्लंघन अदालत की अवमानना नही है। इस पर पीठ ने कहा बहुत हो गया, अगली तारीख को देखेंगे। जब रोहतगी ने कहा कि पतंजलि से बाबा रामदेव का लेना-देना नही है, तो पीठ ने कहा पतंजलि के विज्ञापनों में उनकी तस्वीर होती है।
Supreme Court to Patanjali:सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद की कथित भ्रामक विज्ञापनों के मामले में कारण बताओं नोटिस का जवाब अब तक नही देने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को दो हफ्ते बाद कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट की पीठ, भारतीय चिकित्सा संघ (आई एम ए) की याचिका पर सुनवाई कर रही है। जिसमें आरोप लगाया गया है कि बाबा रामदेव और उनकी कंपनी आधुनिक चिकित्सा पद्धति को बदनाम कर रही है और अपनी दवाओं के विज्ञापनों में आधारहीन दावे करती है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में पतंजलि आयुर्वेद के उत्पादों के प्रत्येक विज्ञापन में झूठे दावे पर एक करोड रुपए का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि रामदेव और पतंजलि के चैयरमेन आचार्य बालकृष्ण ने प्रथम दृष्टि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 की धारा 3 और 4 का उल्लंघन किया है। पतंजलि की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस पर कहा कि कानून का उल्लंघन अदालत की अवमानना नही है। इस पर पीठ ने कहा बहुत हो गया, अगली तारीख को देखेंगे। जब रोहतगी ने कहा कि पतंजलि से बाबा रामदेव का लेना-देना नही है, तो पीठ ने कहा पतंजलि के विज्ञापनों में उनकी तस्वीर होती है। कंपनी ने कोर्ट में भ्रामक विज्ञापन नही छपवाने की अंडरटेकिंग दी थी। इसके बावजूद विज्ञापन पर कोर्ट ने पिछली सुनवाई में रामदेव बाबा व आचार्य बालकृष्ण को नोटिस जारी करते हुए पूछा था क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। इसके साथ ही पतंजलि आयुर्वेद की विज्ञापनों पर अस्थायी रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने अफसोस जताया था कि कोई अनुभवजन्य साक्ष्य नही होने के बावजूद पतंजलि झूठा दावा कर देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाएं कुछ बीमारियों को ठीक कर सकती हैं।
कोर्ट ने कहा, भ्रामक दावे कर पतंजलि देश को धोखा दे रही है
पिछली सुनवाई में बेंच ने कहा था- पतंजलि भ्रामक दावे करके देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाओं से कुछ बीमारियां ठीक हो जाएंगी, जबकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। पतंजलि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम में निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज का दावा करने वाले अपने उत्पादों का विज्ञापन नहीं कर सकती है।
कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि पतंजलि के विज्ञापनों पर क्या कार्रवाई की
कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 के तहत पतंजलि के विज्ञापनों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि इस संबंध में डेटा एकत्र किया जा रहा है। कोर्ट ने इस जवाब पर नाराजगी जताई और कंपनी के विज्ञापनों पर नजर रखने का निर्देश दिया

