₹25 के पेट्रोल खर्च में दौड़ेगी 100% इथेनॉल वाली Innova, अक्टूबर में हो सकती है लॉन्च
Toyota Innova Flex Fuel: कल्पना कीजिए एक सात सीटों वाली कार की जो पेट्रोल पर निर्भर किए बिना 100% इथेनॉल से चलती है और हाइब्रिड तकनीक से चलने वाली इलेक्ट्रिक मोटर का भी इस्तेमाल करती है। यह थोड़ा चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, टोयोटा की इसी तरह की इनोवा हाइक्रॉस अक्टूबर में लॉन्च होने वाली है। गडकरी का दावा है कि इस कार का रनिंग कॉस्ट लगभग ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर हो सकता है।
हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि ₹25 प्रति लीटर इथेनॉल की कीमत नहीं है, बल्कि यह अनुमानित परिचालन लागत है। तो आइए, टोयोटा की आगामी फ्लेक्स-फ्यूल इनोवा हाइक्रॉस और इसमें मिलने वाली नई विशेषताओं के बारे में जानते हैं।
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बताया कि उन्हें अक्टूबर में टोयोटा की नई इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल के लॉन्च में आमंत्रित किया गया है। उनके अनुसार, यह कार 100% इथेनॉल पर चलेगी। इसका मतलब है कि शुद्ध इथेनॉल का उपयोग करने से इसे चलाने के लिए पेट्रोल की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, टोयोटा ने अभी तक अक्टूबर में इस कार के आधिकारिक लॉन्च की तारीख की घोषणा नहीं की है।
गडकरी ने कार के चलने के खर्च के बारे में भी एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इसकी लागत लगभग पेट्रोल कार के बराबर, यानी 25 रुपये प्रति लीटर हो सकती है। इसका यह मतलब नहीं है कि एथेनॉल बाजार में 25 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होगा। यहां हम केवल 1 किलोमीटर या 100 किलोमीटर की दूरी के लिए ईंधन की लागत की तुलना कर रहे हैं।
₹25 प्रति लीटर वाले दावे का क्या मतलब है
गडकरी ने अभी तक ₹25 प्रति लीटर की लागत की गणना का सटीक आधार नहीं बताया है। इसलिए, फिलहाल इस आंकड़े को केवल एक दावा ही माना जाना चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो, उनका कहना है कि अगर एक सामान्य पेट्रोल कार 100 किलोमीटर की दूरी तय करती है, तो टोयोटा की इथेनॉल-हाइब्रिड कार उतनी ही दूरी बहुत कम लागत में तय कर सकती है।
इसका सबसे बड़ा कारण एथेनॉल इंजन के साथ एक मजबूत हाइब्रिड सिस्टम का उपयोग है। एथेनॉल की ऊर्जा घनत्व गैसोलीन से कम है, जिसका अर्थ है कि समान दूरी तय करने के लिए अधिक एथेनॉल की आवश्यकता हो सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए, टोयोटा ने इंजन में एक इलेक्ट्रिक मोटर को एकीकृत किया है, जिससे कार कई अवसरों पर इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है।
Toyota पहले ही दिखा चुकी है यह टेक्नोलॉजी
टोयोटा ने अगस्त 2023 में इनोवा हाइक्रॉस पर आधारित एक इलेक्ट्रिक फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया था। इसमें फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के साथ एक मजबूत हाइब्रिड पावरट्रेन था। उस समय, कंपनी ने दावा किया था कि यह कार E20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकती है। Toyota ने बताया था कि इस टेक्नोलॉजी को बाजार में लाने से पहले कैलिब्रेशन, होमोलोगेशन और सर्टिफिकेशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। माना जा रहा है कि इन प्रक्रियाओं पर काफी काम पूरा हो चुका है और अब कंपनी इसके प्रोडक्शन वर्जन को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।
इस Toyota कार की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि इसका इंजन 100% इथेनॉल पर चल सकता है। असली तकनीकी उपलब्धि इसके मजबूत हाइब्रिड सिस्टम में निहित है, जो फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को इलेक्ट्रिक मोटर और एक छोटी बैटरी के साथ जोड़ता है। प्रोटोटाइप मॉडल में लगभग 1.3 से 1.5 किलोवाट-घंटे की बैटरी का इस्तेमाल किया गया था। यह बैटरी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कार में इस्तेमाल होने वाली बड़ी बैटरियों से काफी छोटी है। इसका फायदा यह है कि कार को इलेक्ट्रिक वाहन की तरह बड़ी और भारी बैटरी की जरूरत के बिना बिजली से चलाया जा सकता है।
हाइब्रिड सिस्टम जरूरत के हिसाब से इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर को अलग-अलग कर देता है। कम गति या धीमी गति की स्थितियों में, इलेक्ट्रिक मोटर कार को चलाती है, जबकि जरूरत पड़ने पर इथेनॉल इंजन काम संभाल लेता है। इससे ईंधन की खपत कम करने में मदद मिलती है क्योंकि गैसोलीन की जगह अधिक इथेनॉल का उपयोग किया जा सकता है।
60% बिजली बनाने वाले दावे को ऐसे समझें
नितिन गडकरी ने इस कार के बारे में एक और महत्वपूर्ण दावा किया है। उन्होंने कहा कि इनोवा हाइक्रॉस फ्लेक्स-फ्यूल चलते समय अपनी 60% बिजली खुद पैदा करेगी। हालांकि, इस कथन का सीधा अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि कार अपनी कुल ऊर्जा खपत का 60% स्वयं उत्पन्न करेगी। इसका मतलब यह है कि कार ज्यादातर इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है। मौजूदा इनोवा हाइक्रॉस भी लगभग 60% समय तक ईवी मोड में चल सकती है और कुछ परीक्षण स्थितियों में, इलेक्ट्रिक मोड में लगभग 40% दूरी तय कर सकती है।
इस दौरान, जरूरत पड़ने पर कार का इंजन बंद किया जा सकता है और उसे इलेक्ट्रिक मोटर से चलाया जा सकता है। इसलिए, 60% का आंकड़ा मुख्य रूप से यह दर्शाता है कि कार एक ड्राइविंग चक्र के दौरान कितने समय तक इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है। इसका यह मतलब नहीं है कि कार अपनी 60% बिजली खुद उत्पन्न करती है।
कार में क्या बदलेगा
अगर Toyota अक्टूबर में इस तकनीक को लॉन्च करती है, तो भारत में फ्लेक्स-फ्यूल और हाइब्रिड तकनीक को अपनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। खास बात यह है कि यह कार 100% इथेनॉल पर चल सकेगी और इसमें इलेक्ट्रिक मोटर का भी इस्तेमाल होगा। हालांकि, कार की कीमत, वास्तविक माइलेज, 100% इथेनॉल पर ईंधन दक्षता और ₹25 प्रति लीटर की बताई गई लागत के सटीक आंकड़े अभी तक सामने नहीं आए हैं। इसलिए, इन आंकड़ों की पूरी जानकारी कार के लॉन्च के बाद ही मिलेगी। (एजेंसी)

