US Iran Conflict: क्या टल जाएगा महायुद्ध? अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में महा-बैठक कल, ट्रंप की ‘अस्तित्व मिटाने’ की धमकी के बाद लिया यह बड़ा फैसला
US Iran Conflict: अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भीषण गोलाबारी और मिसाइल हमलों के बीच अमेरिका और ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर सहमत हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अमेरिकी शीर्ष अधिकारी ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि कल मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा (Doha) में एक आपातकालीन बैठक करेंगे।
इस उच्च स्तरीय तकनीकी बातचीत के मद्देनजर दोनों पक्षों ने फिलहाल के लिए सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों को तुरंत रोकने (सीजफायर) का फैसला किया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों सेनाएं फिलहाल अपने कदम पीछे खींचेंगी ताकि वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाज बिना किसी रोक-टोक या खौफ के इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते से आ-जा सकें।
हमले से बढ़ा था विवाद, कच्चे तेल के टैंकर को बनाया था निशाना
इस ताजा विवाद और तनाव की शुरुआत तब हुई जब ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहे कमर्शियल जहाजों पर ईरान ने हमला कर दिया। दरअसल, तेहरान (ईरान) चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाज उसके तट के साथ लगते एक अलग और विशेष समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करें। ईरान ने चेतावनी दी थी कि जो जहाज इस नियम को नहीं मानेंगे, उन्हें निशाना बनाया जाएगा।
हाल ही में, ईरानी नौसैनिक बलों ने ‘किकू’ (Kiku) नामक एक विशाल तेल टैंकर पर आत्मघाती ड्रोन से हमला कर दिया था। इस टैंकर में 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (Crude Oil) लदा हुआ था। इस दुस्साहस के बाद फारस की खाड़ी में युद्ध की स्थिति पैदा हो गई थी।
ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों को किया ध्वस्त
ईरानी ड्रोन हमले का करारा जवाब देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को खुली छूट दे दी। राष्ट्रपति के सीधे निर्देश पर ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (US Central Command) के लड़ाकू विमानों ने ईरान के भीतर घुसकर लगातार दो दिनों तक भारी बमबारी की।
अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास ईरान के 10 प्रमुख सैन्य स्थलों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है। इन हमलों में मुख्य रूप से निशाना बनाया गया:
- ईरान का सैन्य निगरानी ढांचा और संचार प्रणालियां।
- आधुनिक हवाई रक्षा ठिकाने (Air Defense Bases)।
- खतरनाक ड्रोन भंडारण केंद्र और बारूदी सुरंग (Sea Mines) बिछाने की क्षमताएं।
इस भारी तबाही के बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हवाई फायर किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम सीजफायर समझौता पूरी तरह खतरे में पड़ गया था।
डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी- ‘मिटा देंगे ईरान का अस्तित्व’
इस सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। ट्रंप ने लिखा, “यह हमले युद्धविराम समझौते का बार-बार उल्लंघन करने के जवाब में किए गए हैं। ईरान यह न भूले कि एक समय ऐसा आ सकता है, जब अमेरिका के लिए संयम बरतना असंभव होगा। अगर हमें पूरी सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा, तो इस्लामी गणराज्य ईरान का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।”
वॉल स्ट्रीट जर्नल का बड़ा खुलासा: क्या है नया समझौता?
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून की शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा साइन किए गए एक गुप्त मसौदे के तहत होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित खोलने की जिम्मेदारी व्यावहारिक रूप से ईरान को सौंपी गई है। इस समझौते की शर्तों के तहत, ईरान वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएगा। इसके अलावा, ईरान क्षेत्र के अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के नियम और समुद्री सेवाओं का संचालन तय करेगा। अब देखना होगा कि कल दोहा में होने वाली बैठक इस वैश्विक संकट को टालने में कितनी सफल होती है।

