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‘दहेज के लिए नहीं हुई थी ट्विशा की मौत’: CBI जांच रिपोर्ट से केस में यू-टर्न, सास गिरिबाला सिंह को मिली बड़ी राहत

जबलपुर।  मध्य प्रदेश के जबलपुर में सामने आए चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की कानूनी कार्यवाही में बड़ा फेरबदल हुआ है। मामले की तहकीकात कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी नई जांच रिपोर्ट में मुख्य आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दहेज प्रताड़ना के आरोपों से बरी करते हुए क्लीनचिट दे दी है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच में यह मामला ‘डाउरी डेथ’ यानी दहेज के लिए हत्या या आत्महत्या के लिए विवश करने का साबित नहीं हुआ है। जांच एजेंसी के इस आधिकारिक रुख के बाद अब निचली अदालत में जमानत के समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।

जमानत अर्जी में तकनीकी सुधार के निर्देश

सीबीआई के नए निष्कर्ष सामने आने के बाद कोर्ट में गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बचाव पक्ष द्वारा पूर्व में दायर जमानत अर्जी में सीबीआई द्वारा जोड़ी गई नई धाराओं और बदले हुए विधिक प्रावधानों को विधिवत चुनौती नहीं दी गई थी। इस कानूनी खामी को देखते हुए कोर्ट ने बचाव पक्ष को जमानत याचिका में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।

8 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे होगी अगली सुनवाई

गिरिबाला सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने अदालत से आग्रह किया कि बदली हुई परिस्थितियों और सीबीआई के निष्कर्षों के आधार पर अर्जी में सुधार के लिए थोड़ा समय दिया जाए। अदालत ने बचाव पक्ष की दलील को स्वीकार करते हुए जमानत याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की है। बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके चलते वे और उनका बेटा लगातार न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

दोनों पक्षों के वकीलों ने रखा अपना-अपना पक्ष

कोर्ट परिसर में गिरिबाला सिंह की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि सीबीआई की जांच में दहेज प्रताड़ना का आरोप खारिज हो चुका है, इसलिए वे संशोधित विधिक आधारों के साथ आगामी 8 अक्टूबर को रिहाई की मजबूत दलीलें पेश करेंगे। वहीं दूसरी तरफ, मृतका ट्विशा शर्मा के पक्षकार अधिवक्ता पीयूष तिवारी ने कहा कि वे सीबीआई द्वारा दाखिल रिपोर्ट के हर बिंदु का सूक्ष्मता से अध्ययन कर रहे हैं और 8 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अपना कड़ा पक्ष रखेंगे।

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