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Water Crisis: मांढर केनाल में रिपेयरिंग के चलते नहीं पहुंचा गंगरेल का पानी, राजधानी में जल संकट के आसार

Water Crisis:

Water Crisis: बिना किसी सूचना के मांढर केनाल को मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया। अगर कल 27 अप्रैल की शाम तक पानी नहीं पहुंचा तो राजधानी में अचानक गंभीर जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

Water Crisis रायपुर।  मांढर केनाल को बिना किसी सूचना के रिपेयरिंग के लिए बंद कर दिया गया। नतीजन नगर निगम के भाठागांव स्थित खारुन नदी में फिल्टर प्लांट के इंटकवेल में पानी नही पहुंच पा रहा है। अगर कल 27 अप्रैल की शाम तक पानी नही पहुंचा तो राजधानी में भीषण जल संकट की स्थिति अचानक पैदा हो सकती है।

बताया जा रहा है कि सिंचाई विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना की माना की आगे स्थित मांढर केनाल में मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। इसी के चलते 24 अप्रैल से निगम के लिए गंगरेल से छोड़ा गया पानी आधे रास्ते में रुक गया। उधर गुरुवार को जलकर्म अभियंता नगर निगम नरसिंग फरेंद्र के साथ अधिकारी जांच के लिए 15 किलोमीटर दूर घुघवा डेम पहुंचे, तो 45 इंच की जगह 15 इंच पानी खाली पाया। स्थिति को भांपकर जब अधिकारियों के दल निरीक्षण हेतु आगे बढ़ा, तो नहर भी सुखी मिली। तब उन्हें पता चला कि सिंचाई विभाग ने मरम्मत के लिए कच्चा पानी रोक दिया है।

तत्काल वस्तुस्थिति से अधिकारियों ने निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा को अवगत कराने के बाद आयुक्त और जिलाधीश ने सिंचाई विभाग को पत्र लिखने के बाद चर्चा शुरू की। तब आश्वासन मिला कि 26 अप्रैल आज शुक्रवार शाम काम खत्म होगा, कल 27 अप्रैल को पानी मिलेगा। निगम अधिकारियों के मुताबिक अब यदि पानी का लेबल 30 इंच तक गया तो प्लांट की पाइपलाइन में एयर आना शुरू हो जाएगा, इससे मशीन को क्षति पहुंचेगी।

राजधानी  में प्रतिदिन 200 एमएलडी पानी की मांग है

बताया जा रहा है कि राजधानी की जनसंख्या के हिसाब से प्रतिदिन 200 MLD पानी की डिमांड रहती है। इसके ठीक विपरीत निगम अभी 80 MLD अतिरिक्त पानी की सप्लाई कर रही है। अतिरिक्त पानी को मिलाकर 280 MLD ही पानी की सप्लाई निगम कर रहा है। यह अतिरिक्त पानी 80 MLD दुर्ग शहर की एक दिन की पानी सप्लाई के बराबर है। निगम के जलकार्य अधिकारियों ने बताया कि गंगरेल से केनाल होते हुए खारुन तक पानी आने में 3 दिन का समय लगता है। यदि इसे नदी से भेजा जाए तो 4 दिन लगता है। नदी से पानी आने में चोरी का खतरा बढ़ जाता है। गर्मियों में किसान पंप से पानी खींचकर सिंचाई के लिए उपयोग में लाते हैं।

(लेखक डा. विजय )

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