छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव-दूसरा अंतिम चरण का मतदान 17 को, मतदाता की चुप्पी और कयासों का दौर …!

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 :
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : शुक्रवार 17 नवंबर को दूसरे चरण के मतदान के साथ मतदान कार्यक्रम संपन्न होगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 7 नवंबर को पूरा हो गया था। 17 नवंबर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 शुक्रवार को दूसरे चरण के मतदान के साथ-मतदान कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा। फिर 3 दिसंबर को मतगणना होगी। सन 2018 के चुनाव की तरह इस बार के चुनाव में भी मतदाता मौन बना हुआ है। लिहाजा राजनीतिक विश्लेषक कयास लगा रहे हैं।
दोनों प्रमुख दल भाजपा, कांग्रेस के मध्य सीधे मुकाबला दिख रहा है। दोनों ने 90-90 प्रत्याशी समस्त 90 विधानसभा क्षेत्रों में उतारे हैं। किसी से गठजोड़ नहीं किया है।
दोनों प्रमुख दलों ने करीब दो-दो दर्जन चुनावी वायदे अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर रखे हैं। मतदाता को रिझाने का पूरा प्रयास किया गया हैं। मजे की बात है कि शराब बंदी के ऊपर इस दोनों में से किसी ने नहीं किया है। पर धान पर क्रमशः 3100 रुपए,एवं 3200 रुपए क्विंटल देने का वायदा करने के साथ अन्य आकर्षक वायदे शामिल हैं। शर्त यही है कि मतदाता उनकी सरकार बनाए।
बहरहाल तमाम प्रयासों के बाद भी मतदाता चुप्पी साधे यानी मौन धारण किए हुए हैं। लिहाजा राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने आंकलननुसार समीक्षा व्यवस्था कर रहे हैं। पर पूरे पत्ते नहीं खोल रहे हैं।
उपरोक्त स्थिति के चलते पढ़ा -लिखा मतदाता जो विश्लेषकों को पढ़ता, गुनता एवं फिर अपनी सोच के साथ घाल- मेलकर नतीजे पर पहुंचता हैं। वह नहीं पहुंच पा रहा हैं। ऐसे में उसका यानी पढ़े लिखे वायदों से अप्रभावित वर्ग किसे वोट देगा। यह रुझान नजर नहीं आ रहा है।
अलबत्ता ग्रामीण, किसान, मजदूर, असंगठित क्षेत्र के लोग, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, विद्यार्थी, महिला, वंचित वर्ग आदि की सभाओं में भीड़ जमवाड़ा देख या रैली, जुलूस में सैलाब देख कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसे कयास लगाने वाले या भूल जाते हैं। या फिर नजर अंदाज कर जाते हैं। कि उपरोक्त तबके के कुछ लोग अलग-अलग यानी दोनों दलों की सभाओं, रैलियां, जुलूस में ले जाए जाते हैं।
बहरहाल मतदाता पूर्व की अपेक्षा जागरूक होता जा रहा है। जो विकास के एक पैमाने का हिस्सा है। कुछ वैसा ही जैसा कि अमीर ओर अमीर या सफल व्यवसायी ओर सफल होते जाता हैं। कुछ-कुछ मतदाता इसी तर्ज पर चुनाव दर चुनाव जागरूक होते जाते हैं। शायद एक औसत दर्जे के विद्यार्थी की तरह। देर से सही पर समझदार हो जाता है। विद्यार्थी उसी तरह।
खैर ! सबका अपना-अपना मत। जैसा उपयोग करें। पर सोच- विचार कर आगे-पीछे, भविष्य देख कर। देश, शहर, गांव, कस्बे की स्थिति देखकर। पार्टी दल की नीतियां देख कर। प्रत्याशी को ठोक बजा कर देख कर अपना मत तय करे। तो आगे सुकून रहेगा। बहकावे में आए बैगर निर्णय करने से खुद में गंभीरता का एहसास होता है। बाकी चुनाव नतीजा जो आए उसे तो स्वीकार करना ही पड़ता हैं।
(लेखक डॉ. विजय )