राम से है अटूट रिश्ता, रामनामी समुदाय की सेतबाई ने अपने पूरे शरीर पर गुदवाया राम नाम
रामनामी समाज
रामनामी समाज : रामनामी समाज की प्रदेशाध्यक्ष सेतबाई रामनामी ने अपने शरीर भर में भगवान राम का नाम का गोदना गुदवा रखा है। उसने 35 वर्ष की उम्र में सिंदूर, बिंदिया, चूड़ी, नथनी, बिछिया आदि चीजें त्याग दी है। जबकि वह विवाहित स्त्री है। अब सेतबाई रामनामी समाज अपने समुदाय की समूह संस्कृति प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
सेतबाई रामनामी की प्रभु राम के प्रति भक्ति ध्यानाकर्षित कराती है। वैसे तो रामनामी सम्प्रदाय के लोग अपने शरीर पर राम का नाम का गोदना कई जगह गुदवाते हैं। पर जैजेपुर के पास मालखरौदा के तहत ग्राम पंचायत सारसकेला की निवासी सेतबाई को देख लोग अचरज में पड़ जाते हैं। जिसने हिंदू धर्म में विवाहिता द्वारा धारण करने वाली तमाम चीजों का त्याग कर दिया है। 40 वर्ष पूर्व पूरे शरीर पर उसने राम नाम का गोदना गुदवाकर अपना जीवन भगवान राम को समर्पित कर दिया है। उसका कहना है कि अपना जीवन वह रामनामी समाज के साथ अपने समुदाय के लिए लगा दिया है। समुदाय की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध। राम नाम गुदवाने की प्रेरणा उन्हें अपने दादा-दादी और अन्य पूर्वजों से मिली। जिनके शरीर पर भी इसी तरह के गोदना बने हुए थे। उनकी चौथी पीढ़ी आज इसी तरह ईश्वर को समर्पित है।
सेतबाई जन सरोकार से भी जुड़ी हैं। एक बार भीषण अकाल पड़ा। भुखमरी के हालात पैदा हो गए तब सेतबाई ने अपनी जमीन बेचकर उससे प्राप्त पैसे को समाज के लोगों में इसलिए बांट दिया ताकि लोग अपना पेट भर सके। वह कहती है कि भगवान ने हमें मानव शरीर दिया है। इसलिए इसका उपयोग मानवता के लिए किया जाना चाहिए। दिखावे में या लड़ाई-झगड़े या द्देष-ईर्ष्या में नहीं गंवाना चाहिए। समाज के लिए मानव सेवा से बढ़कर कोई दूसरा कार्य नहीं है।

