ओडिशा राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर, बीजेडी और कांग्रेस में बगावत, 10 विधायकों के क्रॉस वोटिंग की खबर
ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और कांग्रेस के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 10 विधायकों ने बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है।
भुवनेश्वर: ओडिशा में राज्यसभा के लिए वोटिंग के दौरान बड़ा उलटफेर हुआ है। नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और कांग्रेस दोनों के विधायकों में बगावत की खबर है। ओटीवी न्यूज की खबर के मुताबिक ओडिशा राज्यसभा चुनाव में लगभग 10 विपक्षी विधायकों ने ‘क्रॉस वोटिंग’ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजू जनता दल के 5 और कांग्रेस के तीन विधायकों ने राज्यसभा उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की।
इन विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने की खबर
रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस के दशरथी गोमांगो, सोफिया फिरदौस, रमेश चंद्र जेना; बीजेडी के चक्रामणि कन्हार, देवी रंजन त्रिपाठी, सुभाषिनी जेना, सौविक बिस्वाल, नबा मुल्लिक; और बीजेडी के निलंबित विधायक नबा किशोर मल्लिक, सनातन महाकुड, अरबिंद महापात्र, इन सभी ने संयुक्त बीजेडी-कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ और बीजेपी-समर्थित व्यवसायी दिलीप राय के पक्ष में वोट दिया।
ओडिशा में राजनीतिक हलचल तेज
हालिया चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोप सामने आने के बाद सोमवार को ओडिशा में राजनीतिक हलचल मच गई, जिसमें नेताओं ने पार्टी के फैसलों के खिलाफ खुलकर असंतोष व्यक्त किया। यह विवाद तब और गहरा गया जब बीजेडी विधायक देवी त्रिपाठी ने पार्टी लाइन के खिलाफ वोट देने और किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन करने की बात स्वीकार की।
मैंने दिलीप राय को वोट दिया-देवी त्रिपाठी
मीडिया से बात करते हुए, देवी त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि उन्होंने वरिष्ठ नेता दिलीप राय के लिए वोट दिया था। अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए, विधायक ने कहा कि उनका वोट बीजू पटनायक की विरासत को बनाए रखने की इच्छा से प्रेरित था। त्रिपाठी ने उस बात पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की जिसे उन्होंने ‘अनैतिक गठबंधन’ बताया, और बीजू जनता दल तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच कथित आपसी समझ पर सवाल उठाए।
नवीन पटनायक ने जताया असंतोष
उधर, बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक ने राज्य में चल रहे राज्यसभा चुनावों में मतदान प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि चुनाव नियमों का उल्लंघन तब हुआ जब एक विधायक को दूसरा मतपत्र (बैलेट पेपर) जारी किया गया। पटनायक ने कहा कि मतदान अधिकारी ने नियमों के खिलाफ काम किया, जब ब्रह्मगिरि विधानसभा क्षेत्र की एक विधायक ने वोट डालते समय गलती कर दी और उन्हें दूसरा मतपत्र उपलब्ध करा दिया गया। उन्होंने कहा “ब्रह्मगिरि की MLA ने वोट डालते समय साफ़-साफ़ गलती की थी। लेकिन वोटिंग रूम में बैठे जिस अधिकारी की इस काम की ज़िम्मेदारी थी, उसने गैर-कानूनी तरीके से उनका वोट मान लिया और उन्हें दूसरा बैलेट पेपर जारी कर दिया। यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों के खिलाफ़ है और चुनावी नियमों का उल्लंघन है।
अंतरात्मा ने अलग रुख अपनाने को मजबूर किया
देवी त्रिपाठी ने कहा कि उनसे वोटिंग के दौरान दत्तेश्वर होता का समर्थन करने के लिए कहा गया था। हालाकि, उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें ऐसे उम्मीदवार को वोट क्यों देना चाहिए जिसे उन्होंने ‘गलत गठबंधन’ का उम्मीदवार बताया, और ज़ोर देकर कहा कि उनकी अंतरात्मा ने उन्हें एक अलग रुख अपनाने के लिए मजबूर किया। यह विवाद तब और गहरा गया जब एक और नेता, सौविक बिस्वाल ने भी क्रॉस-वोटिंग करने की बात मानी। बिस्वाल ने कहा कि उन्होंने उस व्यक्ति को वोट दिया, जिसे उनके शब्दों में, ‘बीजू बाबू का आशीर्वाद’ मिला हुआ था। उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कामकाज पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जब उनके पिता को पहले पार्टी से निकाल दिया गया था, तो उन्हें क्यों नहीं निकाला गया।
कांग्रेस विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग पर क्या बोले भक्त चरण दास?
उधर, कांग्रेस के तीन विधायकों के क्रॉस वोटिंग की खबर पर ओडिशा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, “पहले हैं रमेश जेना,दूसरे हैं रमेश जेना,जिनके बारे में मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के सारी बातें बताई थीं,तीसरी हैं सोफिया बेटी। मैं सोच रहा था सोफिया बहुत विद्वान हैं और अपने भविष्य को देखेगी,इस बीच उन्होंने बहुत से बयान दिए,जिन्हें मैंने इग्नोर कर दिया था। उन्हें कैफियत मांगा गया था,हमने उसे भी लाइमलाइट से हटा दिया ताकि उसके भविष्य पर आंच न आए। वे एक सेकुलर पॉलिटिक्स करती आई हैं। माइनॉरिटी कम्युनिटी में उनकी तरह व्यक्तित्व नहीं है। दल के लिए और उनके खुद के लिए एक अच्छा भविष्य है। हम उनके पिता पर कार्रवाई करने के बाद भी उनपर भरोसा कर रहे थे। कल भी उसने मुझसे बात की थी। आज सुबह भी हमारी 2 बार फोन पर बात हुई। उसने मुझसे पूछा था कि मैं कहां आऊं। 2 बार बातें हुई थी। मैंने उसे अपने कार्यालय आने को कहा था,वह आई और गई भी,लेकिन मुझे जो वोट दिखाया…कितनी सुंदर तरीके से,इस तरह भी…मुझे लग ही रहा था कि वह नहीं देंगी !
भक्त चरण दास ने आगे कहा, ‘ हम इसीलिए इनलोगों को बेंगलुरु नहीं लेकर गए क्योंकि विधान सभा का सत्र जारी था। हमारे वरिष्ठ नेता ताराप्रसाद बाहिनिपति भी नहीं गए। विधान सभा में बोलने वाले लोग यानी वोकल लोग, सोफिया भी वोकल थी, तारा बाबू भी वरिष्ठ नेता हैं,उनकी तबियत भी खराब रहती है,उन्हें लेजाकर उनकी तबियत खराब नहीं करना चाहते थे हम। रमेश जेना ने भी हमें हां कहा था। मेरे घर पर आका खा-पीकर मीडिया के सामने हां कहा था। मुझे जितने लोगों ने कहा कि रमेश जेना ऐसा कर सकते हैं, मैंने उनपर विश्वास नहीं किया था। कांग्रेस पार्टी की जो जिम्मेदारी थी उनकी उनके गंजाम में,उन्हें उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया”
ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार
राज्य से राज्यसभा की चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। बीजद की ओर से संतृप्त मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को भाजपा का समर्थन मिला है। दूसरी तरफ डॉ. दत्तेश्वर होता बीजद और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जिन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का भी समर्थन प्राप्त है।
चुनाव नियमों के अनुसार, विधायकों को वोट डालने के बाद अपने चिह्नित बैलेट पेपर को अपनी पार्टी के एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है, अन्यथा उनका वोट अमान्य हो सकता है। भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन को एजेंट बनाया गया है। बीजद के एजेंट प्रताप केशरी देव हैं, जबकि कांग्रेस के एजेंट की जिम्मेदारी भक्त चरण दास संभाल रहे हैं। कुल मिलाकर, क्रॉस वोटिंग के आरोप और मतदान के दौरान हुए विवाद ने ओडिशा के राज्यसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण बना दिया है। अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम और आगे की राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी हुई हैं।

