Fri. Jan 9th, 2026

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर बढ़ा सस्पेंस, कार्यकर्ता दिल्ली तक लगा रहे दौड़

Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। इसे लेकर दावेदार दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। इस बीच बैकडोर एंट्री का खतरा बढ़ गया है..

 

Chhattisgarh Congress: महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लामबंदी तेज हो गई है। दरअसल, दिल्ली में पांच दावेदारों के साक्षात्कार के बाद भी बैकडोर एंट्री का खतरा बना हुआ है। यही वजह है कि महिला कांग्रेस की दौड़ में शामिल कार्यकर्ता दिल्ली तक जोर आजमाइश लगा रही है। वरिष्ठ नेताओं से संपर्क बनाकर अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटी है।

Chhattisgarh Congress: दिल्ली में हुआ दावेदारों का साक्षात्कार

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी करने के बाद भी पांच नामों का पैनल बनाकर दिल्ली भेजा गया था। इसके आधार पर दावेदारों का साक्षात्कार हुआ है। इन सबके बीच प्रदेश के एक वरिष्ठ नेता दिल्ली में अपने समर्थक को पद दिलाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। इससे संगठन खेमा में भी हलचल देखी जा रही है।

इन नेताओं के नामों पर हो रही चर्चा

दिल्ली में 5 जनवरी को महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अल्का लांबा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की एक कमेटी की मौजूदगी में प्रदेश की पांच कांग्रेस नेत्रियों का साक्षात्कार हुआ। इनमें बालोद विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक छन्नी साहू, लक्ष्मी ध्रुव, ममता चंद्राकर और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तुलिका कर्मा का नाम शामिल हैं। इनमें से कर्मा को राष्ट्रीय महिला कांग्रेस कार्यकारिणी में राष्ट्रीय सचिव के पद पर पहले ही मनोनीत किया जा चुका है। ऐसे में चार नेत्रियों में से एक को चुने जाने की संभावना बताई जा रही है।

दो नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा

दिल्ली में हुए साक्षात्कार के बाद दोनों की सबसे ज्यादा चर्चा है। इसमें से एक नाम का प्रस्ताव तो उसी समय चला गया था, जब वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा भेजा था। हालांकि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था। अब आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महिला कांग्रेस संगठन को मजबूती देने के लिए नए सिरे से प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की कवायद की जा रही है

तेजतर्रार नेत्री को ही मिलेगी जिम्मेदारी

इस लिहाज से इसमें एक तेजतर्रार कांग्रेस नेत्री को जिम्मेदारी देने की चर्चा है। ये नेत्री वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री की करीबी मानी जाती है। जबकि एक नेत्री पूर्व डिप्टी सीएम की करीबी बताई जाती है। वैसे संगठन पुराने अनुभव से सबक लेता है, जो मौजूद विधायक को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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