Underwater Metro: 45 सेकेंड में 520 मीटर की दूरी- देश की पहली अंडर वॉटर मेट्रो टनल की जानें खासियत
Underwater Metro: यह ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है। रूट के चार प्रमुख स्टेशन एस्प्लेनेड, महाकरण, हावड़ा ओर हावड़ा मैदान हैं।
Underwater Metro: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पश्चिम बंगाल (West Bengal) में देश के पहले अंडरवॉटर मेट्रो सेक्शन का उद्घाटन किया। कोलकाता में तैयार किया गया यह भारत में अंडरवॉटर ट्रेन चलने का पहला प्रोजेक्ट होगा। इस मेट्रो ट्रेन के लिए नदी के नीचे सुरंग बनाया गया है।
क्या है यह परियोजना?
यह सुरंग कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर का हिस्सा है, जो हुगली नदी के नीचे बनी है। इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन हैं। इस मेट्रो रूट के चार प्रमुख स्टेशन एस्प्लेनेड, महाकरण, हावड़ा और हावड़ा मैदान हैं। इस मेट्रो टनल का काम 2017 में शुरू हुआ था। इसके साथ ही हावड़ा मेट्रो स्टेशन भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बन गया है।
फरवरी 2020 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने साल्ट लेक सेक्टर वी और साल्ट लेक स्टेडियम को जोड़ने वाले कोलकाता मेट्रो के पूर्व-पश्चिम मेट्रो कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन किया था। 16.5 किलोमीटर लंबी यह मेट्रो लाइन हुगली के पश्चिमी तट पर स्थित हावड़ा को पूर्वी तट पर साल्ट लेक शहर से जोड़ती है।
हावड़ा से एस्प्लेनेड तक का रास्ता करीब 4।8 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है। अंडरग्राउंड पूरी टनल करीब 10।8 किलोमीटर लंबी है। पानी के नीचे 520 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को 1 मिनट से भी कम (45 सेकंड) समय लगेगा। अंडरवाटर ट्रेन सुरंग कोलकाता में हुगली नदी के नीचे 520 मीटर तक फैली होगी। इसका निर्माण कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (KMRC) द्वारा किया जा रहा है।
नदी के तल से 32 मीटर नीचे बनाई गई है मेट्रो
बता दें कि ये अंडर वॉटर मेट्रो टनल हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड सेक्शन के बीच में दौड़ेगी। इस मेट्रो टनल को हुगली नदी के तल से 32 मीटर नीचे बनाया गया है। कोलकाता मेट्रो हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड टनल भारत में किसी भी नदी के नीचे बनाया जाने वाला पहला ट्रांसपोर्ट टनल है। माना जा रहा है कि यह अंडरग्राउंड मेट्रो 45 सेकेंड में हुगली नदी के नीचे 520 मीटर की दूरी तय करेगी।
इस रूट पर होंगे 4 अंडरवॉटर मेट्रो स्टेशन
हावड़ा मैदान से एस्प्लेनेड तक 4।8 किलोमीटर का रूट बनकर तैयार हो गया है। इस रूट में 4 अंडरग्राउंड स्टेशन – हावड़ा मैदान, हावड़ा स्टेशन, महाकरण और एस्प्लेनेड हावड़ा स्टेशन शामिल हैं, जो जमीन से 30 किलोमीटर नीचे बने हुए हैं। ये दुनिया में सबसे गहराई में बनाया गया मेट्रो स्टेशन है। इससे पहले लंदन और पेरिस में ही पानी के नीचे मेट्रो रूट बने हुए हैं।
2010 में इस प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत
कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर सैयद मो। जमील हसन ने बताया कि 2010 में टनल बनाने का कॉन्ट्रैक्ट एफकॉन्स कंपनी को दिया गया था। एफकॉन्स ने अंडर वॉटर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट सेल बोरिंग मशीन (टीबीएम) मंगाईं थी। इन मशीनों के नाम प्रेरणा और रचना हैं, जो एफकॉन्स के एक कर्मचारी की बेटियों के नाम पर हैं।
टनल के लिए सही जगह की पहचान के लिए हुआ था सर्वे
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी दो चुनौतियां यहीं थीं कि खुदाई के लिए सही मिट्टी का चुनाव कैसे होगा और दूसरा टीबीएम की सेफ्टी कोलकाता में हर 50 मीटर की दूरी पर अलग-अलग तरह की मिट्टी मिलती है। टनल के लिए सही जगह की पहचान के लिए मिट्टी के सर्वे में ही 5 से 6 महीने गुजर गए थे और 3 से 4 बार सर्वे किए जाने के बाद तय किया गया कि हावड़ा ब्रिज से हुगली नदी के तल से 13 मीटर नीचे की मिट्टी पर टनल बनाई जा सकती है।
सुरंग कितनी गहरी है?
पूर्व-पश्चिम खंड 16।6 किलोमीटर लंबा है। यह मेट्रो जमीन से 33 मीटर नीचे और हुगली नदी के तल से 13 मीटर नीचे चलेगी।
प्रोजेक्ट की लागत क्या है?
इस परियोजना की लागत लगभग 8,600 करोड़ रुपये है। India।com की रिपोर्ट के अनुसार, जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने परियोजना की लागत का 48।5 प्रतिशत निवेश किया है।
सुरंग किससे बनी है?
सुरंग को पानी के भीतर उपयोग के योग्य बनाने के लिए, इसके कंक्रीट को फ्लाई ऐश और माइक्रो-सिलिका के साथ डिजाइन किया गया है। जो इसे जलरोधी बना देता है।
यात्रियों के लिए कब शुरू होगा?
मेट्रो के एक अधिकारी ने बताया कि इसका उद्घाटन 6 मार्च को होगा। लेकिन आम यात्रियों के लिए इसे कुछ समय बाद खोला जाएगा।

