‘मैं सबको मरने नहीं दे सकता था…’, कैप्टन स्मित माछर ने बताया विमान के अंदर क्या हुआ
एक उड़ान के दौरान सामने आई मुश्किल परिस्थिति ने कैप्टन स्मित माछर को जिंदगी के ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया, जहां एक तरफ खुद की सुरक्षा थी और दूसरी तरफ विमान में सवार यात्रियों की जिम्मेदारी। उस वक्त हालात कितने चुनौतीपूर्ण थे, इसका अंदाजा उनकी बातों से लगाया जा सकता है।
घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित माछर से फोन पर बातचीत की। इस दौरान स्मित ने उस पल को याद किया, जब वह खुद गिर चुके थे, लेकिन उन्हें विमान और उसमें मौजूद लोगों की चिंता थी।
‘मैं गिर चुका था, लेकिन मुझे लगा…’
कैप्टन स्मित ने बताया कि विमान के हालात को देखते हुए उन्हें तुरंत समझ आ गया था कि उन्हें कुछ करना होगा। उन्होंने कहा—
“मैं गिर चुका था, लेकिन मुझे लगा कि अगर मैंने कुछ नहीं किया तो…मैं अगर नहीं उठा तो…मैं 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं. मैं जब नीचे गिरा तो जहाज नीचे की तरफ आ रहा था. मुझे बिल्कुल पता था कि ये लास्ट पुश है स्मित कुछ कर दे. दरवाजा बस वही है, तब भी मैं मार खा ही रहा था. बाकी सबका भी वहां उतना ही रोल था. मैं सबको नहीं मरने दे सकता. मैं मुश्किल हालात में हनुमान चालीसा पढ़ रहा था. मैं हमेशा पढ़ता हूं.”
उनकी इस बात में उस समय की मानसिक स्थिति और यात्रियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दोनों साफ नजर आती हैं। स्मित ने यह भी बताया कि मुश्किल वक्त में हनुमान चालीसा का पाठ उनके लिए हिम्मत का सहारा बना।
‘मैं लाइफ के लिए लड़ रहा था’
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि खुद प्रधानमंत्री उनसे बात करेंगे।
“मैंने कभी सोचा नहीं था कि आपसे बातचीत होगी. मेरा हौसला बढ़ा रहे हैं. गर्व महसूस हो रहा है. मैं उस मूवमेंट में, मैं लाइफ के लिए लड़ रहा था.”
उन्होंने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के बारे में भी बात की।
“मैं सुबह में हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं. संस्कृति से दूर नहीं हूं. मैं यहां भी देश से दूर नहीं हूं.”
PM Modi ने कहा- देश आपके साथ है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान कैप्टन के परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने उनकी मां और पत्नी से बात की है। पीएम ने कैप्टन के साहस की सराहना करते हुए कहा—
“अगर मेरे सामने आप भावुक नहीं होगे तो कहां होंगे? आपने इतना बड़ा काम किया है, हर देशवासी दुनिया के लोग आपसे मिलने और बातचीत के लिए आतुर हैं. आपने हनुमान चालीसा की बात कही…मैं इसके लिए गीता बेन को प्रणाम करूंगा. मैं आपकी मां और पत्नी से बात की. बहुत हिम्मत से वो बात कर रहीं थी. पूरे देश का नाम आपने रौशन किया है.”
प्रधानमंत्री ने कैप्टन के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की और कहा कि पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा है।
“आपके लिए दुआएं कर रहे हैं. पूजा प्रार्थना कर रहे हैं. उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं. आप जल्द ही स्वस्थ्य होंगे. आपके स्वागत के लिए देश तैयार है. मैं सऊदी सरकार का आभारी हूं. आपको जब भी जरूरत लगे, हम फोन पर हैं. आपने सबको बचा लिया.”
‘इतने लोगों की जान बचा ली’
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कैप्टन की सूझबूझ और बेहद कम समय में लिए गए फैसले का जिक्र किया।
“आपके धैर्य, सूजबूझ ने फिक्सन ऑफ सेकेंड में निर्णय लिया और इतने लोगों की जान बचा ली. हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले नहीं, देने वाले हैं.”
कैप्टन स्मित माछर की कहानी में एक पायलट की जिम्मेदारी के साथ उस इंसानी जज्बे की झलक भी मिलती है, जिसमें मुश्किल वक्त में खुद से पहले दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी यही अनुभव बार-बार सामने आया।

