अंडों में नाइट्रोफ्यूरान विवाद, छत्तीसगढ़ में FSSAI सख्त, जांच के निर्देश
कर्नाटक की एक कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित रसायन नाइट्रोफ्यूरान पाए जाने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देशभर में अंडों …और पढ़ें
रायपुर। कर्नाटक की एक कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित रसायन नाइट्रोफ्यूरान पाए जाने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देशभर में अंडों की जांच के निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से अंडों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजने को कहा गया है। जांच में यदि खतरनाक केमिकल की पुष्टि होती है तो संबंधित बैच से लीगल सैंपल लेकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रायपुर में रोज पांच लाख अंडों की खपत
ठंड के मौसम में अंडों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। अकेले रायपुर में प्रतिदिन करीब पांच लाख अंडों की खपत होती है। ऐसे में सप्लाई चेन के किसी भी स्तर पर मिलावट या प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग की स्थिति में बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।
नाइट्रोफ्यूरान क्यों है खतरनाक
नाइट्रोफ्यूरान एक सिंथेटिक एंटीमाइक्रोबियल दवा है, जिसका पहले मुर्गी, मछली और झींगा जैसे खाद्य पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जाता था। भारत सहित कई देशों में खाद्य पशुओं में इसका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह रसायन शरीर में टूटता नहीं, बल्कि जमा होता है। पशुओं को यह दवा देने पर इसके अवशेष मांस, अंडे और मछली में रह जाते हैं, जो भोजन के जरिए इंसानों तक पहुंचते हैं।
सेहत पर गंभीर खतरा
नाइट्रोफ्यूरान के अवशेषों का लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर का खतरा, लिवर को नुकसान, किडनी डैमेज, आंतों और पाचन तंत्र की समस्याएं, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और जीन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी कारण प्रतिबंधित एंटीबायोटिक का पाया जाना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी माना जा रहा है।
अधिकारियों का क्या कहना
दीपक अग्रवाल, नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि रायपुर सहित प्रदेशभर के बाजारों से रेंडम सैंपलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले अंडों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

