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अखंड सौभाग्य के लिए 24 घंटे का निर्जला तीजा व्रत शुरू

गांव-कस्बों का माहौल देखते बन रहा, भजन-पूजन कीर्तन खेलकूद से समय काट रही तिजहरिनें

रायपुर। तीजा पर विवाहित महिलाओं ने सोमवार को अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला तीजा व्रत धारण किया। तकरीबन 30 घंटे का कठिन व्रत कल मंगलवार सुबह सूर्योदय पर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की पूजा अर्चना कर तीखुर-सिंघाड़े फल नारियल का प्रसाद ग्रहण कर तोडा जाएगा।

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राजधानी समेत समूचे प्रदेश में लाखों छत्तीसगढ़िया विवाहित महिलाओं ने रविवार रात 10:00 बजे कडू-भात यानी करेला सब्जी और चावल भोजन के तौर पर लिया। जिसके बाद व्रत शुरू हो गया। कडू- भात खाने के पीछे जो भी मान्यता हो पर चिकित्सक मानते हैं कि करेला में ऐसे तत्व होते हैं जो भूखे रहने की स्थिति में बाहरी आक्रमक वायरस से लड़ते हैं उन्हें मात देते हैं। यह व्रत निर्जला है। यानी पानी भी नहीं पीते। मंगलवार अलसुबह सूर्योदय पर जब उपवास तोड़ा जाएगा। तीखुर या सिंघाड़े का प्रसाद ग्रहण करके उपवास तोड़ते हैं। दरअसल इसके पीछे भी वैज्ञानिक सोच है। खाली पेट बाद इन दोनों का ग्रहण करना शारीरिक कोशिकाओं को रिचार्ज करने का कार्य करता है। यानी ऊर्जा देता है। बहरहाल छत्तीसगढ़ प्रदेश में कई लाखों विवाहित महिलाओं ने तीजा व्रत रखा है। जो अखंड सौभाग्यवती होने के लिए है। यानी उनकी जिंदगी में पति सदैव रहें। दूसरे अर्थों में सौभाग्य खंडित न होना, यानी भगवान के घर पति से पहले जाना। विधवाएं भी यह उपवास रखती हैं। दरअसल इसके पीछे यह मनौती रहती है कि भगवान ऐसा समय ( वैधव्य) यानी विधवा जीवन फिर किसी जन्म में ना देना- यानी अखंड सौभाग्यवती रखना।

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इधर सोमवार को महिलाओं ने दिन घर पर पकवान ठेठरी, खुरमी, अनरसा, गुझियां, पपची, खाजा,आदि बनाया। गणेश, शिव-पार्वती माता की आराधना की कीर्तन-पूजन कर हरतालिका व्रत की कथा सुनी। घर-मोहल्ले गलियों में छत्तीसगढ़या महिलाओं का खेल कूद सहेलियों के साथ छोटे- मंझोले समूह बनाकर खेला। जिसमें पिटुल, खो-खो तिरी-पासा, अंताक्षरी, गाना-बजाना आदि शामिल है। ज्यादातर महिलाओं ने रविवार को ही मेहंदी रचा लिया था। जिसका मकसद सोमवार को पकवान समय पर बना सके। पूजा-पाठ एवं खेलकूद भी कर सकें।

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सोमवार को घरों पर या छोटे मंझोले समूहों में फुलेरा बनाया। जिसमें शिव भगवान पार्वती माता, गणेश भगवान की प्रतिमाएं मिट्टी-गोबर से बनाई गई हैं। जिन्हें स्थापित कर चारों पहर पूजा कीर्तन-भजन किया गया। आमतौर पर स्वस्थ रहने पर तिजहरिनें व्रत वाली रात (सोम मंगल दरम्यानी ) सोती नहीं है। सोमवार को स्नान ध्यान कर मायके से प्राप्त नई साड़ी पहन सोलह श्रृंगार किया। ब्यूटी पार्लर वाले भी अपनी सहायिकाओं को मौके पर भेज अच्छी कमाई करते रहें।

सोमवार राज्य सरकार ने दफ्तरों में महिलाओं के लिए विशेष अवकाश था। लिहाजा कामकाजी शासकीय महिलाएं सवैतनिक अवकाश पर रही। पर निजी संस्थाओं में कार्य करने वाली आधी महिलाओं ने छुट्टी ली तो आधी महिलाएं कार्य पर पहुंची हुई थी। प्रदेश भर में गांवों-कस्बों, शहरों में तीजा का माहौल देखते बन रहा था। खासकर गांव-कस्बों में गली-गली गीत-संगीत, भजन-कीर्तन छत्तीसगढ़ियां खेलकूद, गांव के चौपाल, वटवृक्षों के नीचे दरी बिछाकर गाना, बजाना छोटे बच्चों का खेलना कूदना दर्शनीय था। इस दौरान पुरुष वर्ग घरेलू कार्य में सहयोग हाथ बंटा रहे थे। जिनके घर में बेटियां नहीं है और बहू है तीजा मनाने मायके गई है वहां पुरुष वर्ग भोजन पानी के जुगाड़ में दिखे कुछ ने होटल ढाबे तो कुछ नहीं आस-पड़ोस में या खुद जैसे-तैसे बनाकर अपना गुजरा कर रहें हैं।

(लेखक डॉ विजय )

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