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हवाई क्षेत्र होगा मजबूत, रूस से S-400 मिसाइलें खरीदेगा भारत

रूस का S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक करने तथा उसे नष्ट करने में सक्षम है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ कई टारगेट्स को निशाना बना सकता है.

 

भारत सीमा पर लगातार बढ़ती चुनौती को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में लगा हुआ है. केंद्र सरकार ने अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया और रक्षा मंत्री की अगुवाई वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने राफेल जेट विमान के साथ-साथ रूस से 288 अतिरिक्त S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद के लिए अपनी सहमति दे दी है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने रूस से S-400 मिसाइल की खरीद के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये की अपनी स्वीकृति (Acceptance of Necessity- AoN) दे दी है. यह पूरी खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर (FTP) के तहत की जाएगी, ताकि खरीद की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सके. इस बीच भारत को पहले से हुए समझौते के तहत इस साल जून और नवंबर में 2 और S-400 सिस्टम मिलने हैं.

क्या-क्या खरीदा जाएगा?

सूत्रों के मुताबिक भारत इस डील के दौरान रूस से 120 शॉर्ट रेंज की मिसाइलें हासिल करेगा तो 168 लॉन्ग रेंज की मिसाइलें होंगी.पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस तरह से मिसाइलों की जरूरत काफी बढ़ गई है.

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने S-400 सिस्टम का व्यापक इस्तेमाल किया था. इस दौरान 400 किलोमीटर, 200 किलोमीटर, 150 किलोमीटर और 40 किलोमीटर रेंज की मिसाइलों का इस्तेमाल कर दुश्मन के लड़ाकू विमान, AWACS, खुफिया विमान और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया था.

साथ ही भारत ने 314 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक बड़े एयरक्राफ्ट को S-400 की लंबी दूरी की मिसाइल से निशाना बनाया था, जिसके बाद पाकिस्तान को अपने कई विमानों को पश्चिमी सेक्टर में शिफ्ट करना पड़ा था.

लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड की तैयारी

भारतीय वायुसेना रूस से 5 और S-400 सिस्टम खरीदने के साथ-साथ Pantsir शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम लेने पर भी जोर दे रही है. Pantsir सिस्टम खास तौर पर सशस्त्र और कामिकाज़े ड्रोन को मार गिराने के लिए तैयार किया गया है. भारत S-400 और Pantsir के साथ मिलकर एक मजबूत लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड तैयार कर सकेगा, जो सीमा पार से आने वाले हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम होगी.

क्या है S-400 सिस्टम की ताकत?

रूस का S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक करने तथा उसे नष्ट करने में सक्षम है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ कई टारगेट्स को निशाना बना सकता है. इसे भारत की मल्टी लेयर डिफेंस एयर डिफेंस की रीढ़ माना जाता है। इस नई खरीद के साथ भारत अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गया है.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने कल गुरुवार को फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को अपनी मंजूरी दे दी. आधिकारिक बयान के अनुसार, डीएसी ने सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी को मजबूत करने के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की पूंजीगत खरीद को मंजूरी दी. हालांकि मंत्रालय ने खरीद की लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह 2.90 लाख करोड़ रुपये से 3.15 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी.

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