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India Hydrogen Train: भारतीय रेलवे का नया युग! देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन हुआ पूरा; दिल्ली से जींद के बीच दौड़ी ट्रेन, जानिए कब से आम जनता कर सकेगी सफर

India Hydrogen Train: भारतीय रेलवे से देशवासियों के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) जल्द ही पटरियों पर व्यावसायिक रूप से दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। शुक्रवार को इस आधुनिक ट्रेन का दिल्ली और जींद के बीच सफलतापूर्वक ट्रायल रन (Trial Run) किया गया।

इस महत्वपूर्ण टेस्ट के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने ट्रेन के हिलने-डुलने (ऑसिलेशन) और इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (Emergency Braking Distance) जैसे सबसे अहम और संवेदनशील पहलुओं की गहराई से जांच की, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। आपको बता दें कि पिछले महीने 27 मई को नॉर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर इस 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन को चलाने की आधिकारिक मंजूरी मिली थी।

75 किमी की रफ्तार और शून्य प्रदूषण: साइलेंसर से निकलेगा सिर्फ पानी

देश में इस महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य साफ-सुथरे, पर्यावरण अनुकूल और अधिक एनर्जी-एफिशिएंट रेल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।

बेमिसाल तकनीक: रेल मंत्रालय ने बताया कि यह ट्रेन 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से पटरियों पर दौड़ेगी।

इको-फ्रेंडली सफर: यह तकनीक पूरी तरह से हरित ऊर्जा पर आधारित है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल केमिकल रिएक्शन के जरिए बिजली बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रदूषण फैलाने वाले धुएं के बजाय सिर्फ जल-वाष्प (Water Vapor या पानी की भाप) ही बाहर निकलता है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल (डीजल) का सबसे बेहतरीन और स्वच्छ विकल्प है।

ग्लोबल क्लब में भारत की एंट्री:

इस ऐतिहासिक पहल के साथ ही भारत अब जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे दुनिया के उन गिने-चुने और विकसित देशों के ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गया है, जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्टेशन पर तेजी से काम कर रहे हैं।

हरियाणा का जींद-सोनीपत सेक्शन बना पायलट रूट

इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के पहले चरण के संचालन के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए बुनियादी ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है:

रिफ्यूलिंग और स्टोरेज सुविधा: ट्रेनसेट को लगातार ईंधन देने के लिए जींद में ही कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने और रिफ्यूलिंग (ईंधन भरने) की अत्याधुनिक सुविधा विकसित की गई है।

PESO से मिली मंजूरी: पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने इस साइट पर हाइड्रोजन गैस को सुरक्षित स्टोर करने और भरने के लिए जरूरी वैधानिक लाइसेंस भी जारी कर दिया है।

24 घंटे निगरानी और हाई-टेक सुरक्षा इंतजाम

रेलवे मंत्रालय के अनुसार, बिना किसी तकनीकी रुकावट के लगातार काम पक्का करने के लिए रिफ्यूलिंग स्टेशन पर एडवांस हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है। किसी भी आपात स्थिति के लिए एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट का इंतजाम भी किया गया है।

संस्थान ने सुरक्षा के बेहद कड़े मानक तय किए हैं। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने इसके ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल को मंजूरी दे दी है। शकूरबस्ती स्थित मेंटेनेंस डिपो में सुरक्षा उपायों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत हाइड्रोजन प्लांट की 24 घंटे सीसीटीवी और तकनीकी सेंसरों से निगरानी की जाएगी। शुरुआती दौर में यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष रूप से प्रशिक्षित टेक्निकल स्टाफ (Trend Technical Staff) हमेशा ट्रेन के भीतर मौजूद रहेगा।

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