Fri. Jan 9th, 2026

महादेव ऑनलाइन बुक केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 91.82 करोड़ की संपत्तियां अटैच

Mahadev Satta App:

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स के जरिए हजारों करोड़ रुपए का काला धन कमाया गया. यह पैसा फर्जी और बेनामी बैंक खातों के जाल के जरिए इधर-उधर घुमाया गया.

 

महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) 2002 के तहत करीब 91.82 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. इस कार्रवाई में ED ने 74.28 करोड़ रुपए से ज्यादा की बैंक जमा राशि अटैच की है, जो M/s Perfect Plan Investment LLC और M/s Exim General Trading – GZCO के नाम पर थी. ये कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छापरिया से जुड़ी हुई हैं.

जांच में सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसों (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को साफ-सुथरे निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया गया. इसके अलावा, 17.5 करोड़ रुपए की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं, जो गगन गुप्ता की हैं. गगन गुप्ता, Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर तिबरेवाल का करीबी बताया जा रहा है.

हजारों करोड़ रुपए का काला धन कमाया

इन संपत्तियों में महंगी रियल एस्टेट और नकद संपत्तियां शामिल हैं, जो गगन गुप्ता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं और जांच में ये सभी नकद से खरीदी गई पाई गईं, जो अवैध सट्टेबाजी से आया पैसा था. ED की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स के जरिए हजारों करोड़ रुपए का काला धन कमाया गया. यह पैसा फर्जी और बेनामी बैंक खातों के जाल के जरिए इधर-उधर घुमाया गया. सौरभ चंद्राकर और उसके साथियों ने महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए लोगों को ठगा. यह ऐप कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स को चलाने और उनके पैसों के लेन-देन को संभालने के लिए बनाया गया था.

फर्जी KYC दस्तावेजों से बैंक खाते खोले

जांच में यह भी सामने आया कि इन वेबसाइट्स को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि आखिरकार हर ग्राहक को नुकसान ही हो. पहले से तय हिस्सेदारी के हिसाब से हजारों करोड़ रुपए का पैसा इकट्ठा किया गया और बांटा गया. इसके लिए फर्जी या चोरी किए गए KYC दस्तावेजों से बैंक खाते खोले गए और पैसों की असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई. ये सारे लेन-देन न तो हिसाब-किताब में दिखाए गए और न ही टैक्स के दायरे में लाए गए.

विदेशी FPI के नाम पर भारत के शेयर बाजार में निवेश

ED को यह भी पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से कमाया गया पैसा हवाला, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजा गया. बाद में इसी पैसे को विदेशी FPI के नाम पर भारत के शेयर बाजार में निवेश कराया गया. जांच में एक खास तरह की कैशबैक स्कीम भी सामने आई, जिसमें विदेशी FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में बड़ा निवेश करती थीं और बदले में उन कंपनियों के प्रमोटरों को निवेश का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा नकद में वापस देना पड़ता था.

175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी

ED के मुताबिक, गगन गुप्ता को इस तरह के लेन-देन से करीब 98 करोड़ रुपए का फायदा हुआ. इसमें Salasar Techno Engineering Ltd. और Tiger Logistics Ltd. जैसी कंपनियां भी शामिल हैं. अब तक ED इस मामले में 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. जांच के दौरान करीब 2,600 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं. इस केस में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है. ED अब तक 5 चार्जशीट (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल कर चुकी है.

About The Author