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एशियन गेम्स 2023 : शाबाश पारुल ! तुम डीएसपी के लायक हो। …!

एशियन गेम्स 2023 :

एशियन गेम्स 2023 :

एशियन गेम्स 2023 : एशियाड 23 में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट महिला- पारुल चौधरी

एशियन गेम्स 2023 :। लक्ष्य निर्धारित करना और उसके लिए सतत कटिबद्धता अलग-अलग है। एशियन गेम्स 2023  ज्यादातर लक्ष्य तो बनाते हैं पर चाहत भर रह जाती है प्रयास नहीं करते। परंतु कमतर लोग लक्ष्य बनाकर उसके वास्ते कटिबद्ध रहते हैं। नतीजा सामने होता है सफलता कदम चूमती है। जैसा कि एथलीट पारूल चौधरी के साथ हुआ।

Parul Chaudhary: ये 30 सेकेंड नहीं देखा तो क्या देखा, पारुल ने ऐसे जीता गोल्ड, हर भारतीय का सीना हुआ चौड़ा - Republic Bharat

शाबाश – पारुल आपने बता एवं करके दिखा दिया कि अगर ठान लो- संकल्पित हो- जाओ- एक लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने हासिल करने प्रतिबद्धता के साथ जुट जाओ तो लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। हांगझाऊ (चीन ) एशियाड में मंगलवार को उत्तर प्रदेश निवासी प्रसिद्ध धाविका पारूल चौधरी ने 5000 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। पारुल ने एक दिन पूर्व सोमवार को ही 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीता था। इसके साथ ही पारुल 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गई है। पदक जीतने के बाद पारुल ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश में बड़े टूर्नामेंट के स्वर्ण पदक विजेता को डिप्टी सुपरिटेडेंट आफ पुलिस (डीएसपी) बना दिया जाता है। बस मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अगर मैं गोल्ड जीत गई तो डीएसपी का पद मिलेगा- जो मैं हमेशा चाहती हूं। ‘

पारुल ने 5 मिनट 14.75 सेकंड का समय लेकर रेस पूरी की। हालांकि की शुरुआती 4000 मीटर में वे छठे स्थान पर थी। पर 1000 मीटर में उन्होंने शीर्ष तीन में वापसी की और फिर अंतिम 200 मीटर में गजब का फर्राटा भरा और जापान की रिरिका को छोड़ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। गौरतलब है कि पारुल पूर्व में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच चुकी है।

मेहनत जज्बा अगर कुछ कर दिखाने की क्षमता हो तो पारुल चौधरी ने वही कर दिखाया बेशक उसे यूपी सरकार डीएसपी बनाये वह योग्य अधिकारी साबित होगी। युवाओं को पारुल से प्रेरणा लेना चाहिए। राज्य सरकारें अपने खर्चे पर भारत भ्रमण कराए जिससे कि अन्य अन्य युवा उन्हें प्रत्यक्ष देख-सुन अपने लक्ष्य निर्धारित कर उस हेतु पारुल की तरह जुट जाए। सदैव दौड़ती रहना पारुल … !

(लेखक डॉ. विजय )

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