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राजस्थान में फर्जी डॉक्टर का खेल उजागर, 8वीं पास शख्स ने खोल लिया था अपना हॉस्पिटल

जयपुर: राजस्थान पुलिस की एक विशेष शाखा, ‘स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप’ (SOG) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। SOG ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें शामिल लोग फर्जी MBBS डिग्री का इस्तेमाल करके डॉक्टर बन गए थे। राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने ऐसे आठ कथित डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है और SOG फिलहाल इस मामले की जांच कर रही है। SOG की टीम ने इनमें से दो लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार किए गए इन दो ‘डॉक्टरों’ में से एक ने केवल 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है।

8 वीं पास ने खोल लिया हॉस्पिटल

SOG के ADG विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दो लोगों में से एक ने केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। आठवीं तक की पढ़ाई होने के बावजूद, उसने एक फर्जी मेडिकल डिग्री हासिल कर ली। उसने गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग विज्ञान) में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा भी प्राप्त कर लिया और बाद में एक अस्पताल खरीद लिया। हैरानी की बात यह है कि इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे वह राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन कराने में भी कामयाब हो गया। SOG अब इस बात की जांच कर रही है कि रजिस्ट्रेशन कराने के दौरान काउंसिल के किस अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत थी।

जालोर का अस्पताल खरीद कर बना मालिक

SOG ने जालौर की रानीवाड़ा तहसील के रेल क्षेत्र गांव के रहने वाले नानजी राम चौधरी को गिरफ्तार किया है। नानजी राम चौधरी जालौर में भास्कर अस्पताल के मालिक हैं। साल 2010 में, वह एक डॉक्टर के क्लिनिक के काउंटर पर काम करते थे, जहां वे अपॉइंटमेंट स्लिप जारी करने का काम देखते थे। बाद में, उन्होंने रानीवाड़ा में रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान पर काम किया। कपड़ों की दुकान पर तीन साल बिताने के बाद, 2014 में उन्होंने रानीवाड़ा के राजदेव अस्पताल के OPD काउंटर पर काम करना शुरू किया, जहां उनका काम अपॉइंटमेंट स्लिप जारी करना था। अगले ही साल वर्ष 2015 में उसने राजदेव हॉस्पिटल के मालिक से पूरा अस्पताल ही खरीद लिया। वर्ष 2016 में अस्पताल का नाम बदल कर भास्कर अस्पताल कर लिया। पहले कुछ डॉक्टरों को नियुक्त किया और बाद में खुद ही स्त्री रोग विशेषज्ञ बन गया।

जाने कैसे प्राप्त की फर्जी डिग्रियां

SOG के ADG विशाल बंसल के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी नंजीराम चौधरी ने केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। उसने आंध्र प्रदेश सेकेंडरी बोर्ड के नाम से 10वीं और 12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट तैयार कीं। इसके अलावा, उसने कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी से MBBS की एक फर्जी डिग्री भी हासिल की। ​​इतना ही नहीं, उसने गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग विज्ञान) में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा का भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिया। इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके, वह राजस्थान मेडिकल काउंसिल में खुद को डॉक्टर के तौर पर रजिस्टर कराने में भी कामयाब हो गया।

FMG टेस्ट क्लियर नहीं हुआ तो लगाई फर्जी डिग्री

SOG द्वारा हिरासत में लिया गया दूसरा आरोपी पंकज यादव है। वह सीकर जिले की खंडेला तहसील के कालियावास गांव का रहने वाला है। पंकज ने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की। भारत लौटने के बाद, उसने ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन’ (FMGE) छह बार दिया, लेकिन वह इसे पास नहीं कर सका। इसके बाद, पंकज ने बिहार स्थित श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज से MBBS की एक फर्जी डिग्री और मार्कशीट हासिल कर ली। इसके अतिरिक्त बिहार मेडिकल काउंसिल के पंजीयन का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में प्रस्तुत किया और उसके आधार पर पंजीयन करवाया। काउंसिल द्वारा जब सत्यापन कराया गया तो सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।

मामला दर्ज करवाया गया था

SOG के ADG विशाल बंसल ने बताया कि 6 अक्टूबर 2024 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल की ओर से जयपुर के अशोक नगर पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जांच SOG को सौंप दी गई। FIR में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है: शांतनु कुमार चरण, दीपक चौधरी, देबेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, पंकज यादव, महेश कुमार गुर्जर, सारिमुल मजूमदार और राम किशोर महावर। इनमें से दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी लोगों के खिलाफ जांच अभी चल रही है। (एजेंसी)

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