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रसोई में एथेनॉल की एंट्री, सरकार देगी सब्सिडी, LPG को मिलेगी चुनौती

Ethanol For Cooking Fuel : पेट्रोल में E20 मिलावट के बाद, खाना पकाने के ईंधन के रूप में एलपीजी की जगह जल्द ही एथेनॉल ले सकता है। एथेनॉल को लेकर चल रहे विवाद के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में एथेनॉल को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से एक नीति विकसित कर रहा है।

सरकार द्वारा इस मामले की जांच किए जाने की संभावना है और वह सब्सिडी प्रणाली भी लागू कर सकती है। इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन आपूर्तिकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संघ प्रस्तावित नीति पर सरकार के साथ समानांतर चर्चा कर रहे हैं।

अप्रैल तक तैयार हो सकती है पॉलिसी

खाना पकाने के लिए एथेनॉल पर नीति सितंबर तक तैयार हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलपीजी परअपनी निर्भरता कम करने और आयात बिल घटाने के लिए खाना पकाने के ईंधन के रूप में एथेनॉल का उपयोग किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि एक वैकल्पिक स्वच्छ खाना पकाने की नीति पर काम चल रहा है, जो एलपीजी के साथ-साथ घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में एथेनॉल को अपनाने को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

अप्रैल में आई एक रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि सरकारी निर्देश के बाद घरेलू खाना पकाने के लिए एक स्वच्छ विकल्प के रूप में एथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव का परीक्षण किया जा रहा था।

सब्सिडी योजना भी शुरू कर सकती है सरकार

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सरकार खाना पकाने के लिएएथेनॉल को बढ़ावा देने हेतु सब्सिडी योजनाएं भी शुरू कर सकती है। घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में एथेनॉल को बढ़ावा देने का भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है जब घरेलू स्तर पर एथेनॉल की उपलब्धता में तेजी से वृद्धि हुई है। मई में जारी केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता पहले ही 20 अरब लीटर से अधिक हो चुकी है, और चालू वित्त वर्ष के दौरान इसमें अतिरिक्त 4 अरब लीटर की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

इस क्षमता में से, सरकार की E20 एथेनॉल मिश्रण योजना के तहत सालाना लगभग 11 अरब लीटर की खपत होती है, जबकि शराब निर्माता, दवा कंपनियां और रसायन उत्पादक मिलकर 3-3.5 अरब लीटर का उपयोग करते हैं। इससे लगभग 7 अरब लीटर उत्पादन क्षमता अप्रयुक्त रह जाती है। भारत नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी बाजारों में एथेनॉल निर्यात के अवसरों का भी लाभ उठा सकता है, जहां एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 10% है, लेकिन घरेलू कच्चे माल की उपलब्धता अपर्याप्त बनी हुई है।

तेल कंपनियां भी इस चर्चा में शामिल

माना जा रहा है कि तेल विपणन कंपनियां भी इस पहल से संबंधित चर्चाओं में शामिल हैं। उन्होंने एथेनॉल से चलने वाले चूल्हों से संबंधित अनुसंधान और विकास कार्य किया है और वे मौजूदा एथेनॉल-आधारित खाना पकाने की तकनीकों से संबंधित संभावित अधिग्रहण या साझेदारी की संभावनाओं का पता लगा रही हैं।(एजेंसी)

 

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