विमल कुमार केस में नया मोड़, FIR में विधायक का नाम नहीं, पत्नी ने मांगा 8 करोड़ का मुआवजा
औरंगाबाद: रोहतास के चर्चित कार्यकारी अधिकारी विमल कुमार हत्याकांड में उनकी पत्नी ने सरकार से भारी मुआवजे और परिवार के भविष्य की सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें कम से कम 8 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के भरण-पोषण के लिए राजपत्रित सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके पति ने बच्चों का पालन-पोषण अच्छे से किया, लेकिन अब परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्हें हर महीने 30 हजार रुपये की EMI भी चुकानी पड़ती है। वहीं, इस पूरे मामले में दर्ज FIR में लोजपा आर के विधायक का नाम शामिल नहीं है।
EO का हत्यारा कौन?
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि EO का असली हत्यारा कौन है, और पुलिस इस मामले का पूरा रहस्य कब उजागर करेगी? यह मामला इतना जटिल क्यों लगता है? इसका कारण EO की पत्नी और मुख्य आरोपी की पत्नी द्वारा दिए गए विरोधाभासी बयान हैं। इसलिए, सबसे पहले आइए समझते हैं कि डेहरी विधायक ने EO की पत्नी, मुख्य आरोपी की पत्नी और उन पर लगे आरोपों के बारे में क्या कहा है।
FIR में विधायक का नाम नहीं
इस मामले में,EO की पत्नी बबीता कुमारी ने डेहरी के लोजपा (राम विलास) विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह पर अपने पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। हालांकि, एफआईआर में विधायक को साजिशकर्ता के रूप में नामित नहीं किया गया है। एफआईआर में ड्राइवर मिथिलेश कुमार का नाम है और दावा किया गया है कि उसने अज्ञात साथियों के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया। ड्राइवर मिथिलेश कुमार की पत्नी आरती देवी ने अपने पति के कबूलनामे पर सवाल उठाया है।
ड्राइवर की पत्नी बोल रही- फंसाया गया
उन्होंने EO की पत्नी बबीता कुमारी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बबीता कुमारी ने विमल कुमार के दावों का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था और उन पर पुलिस की अत्यधिक जिम्मेदारियां थीं। उन्होंने दावा किया कि उनके पति ने कभी भी उनसे अत्यधिक कार्यभार या कार्यकारी अधिकारी के साथ किसी विवाद का जिक्र नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पति ने EO के व्यक्तित्व की प्रशंसा की थी और उनके बीच अच्छे संबंध थे। आरती ने पति के कबूलनामे को पुलिस का दबाव करार दिया है। साथ ही कहा है कि मेरे पति को एक सोची समझी साजिश के तहत जान बूझकर मामले में फंसाया गया है। हालांकि उसने किसी व्यक्ति विशेष पर संदेह जताने से इंकार किया है और मामले की मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।
SIT की जांच में मिले जवाब
मामले में सामने आए विभिन्न बयानों के बीच, कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब एसआईटी की जांच से मिल चुके हैं। पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा ने विमल कुमार हत्याकांड में एसआईटी की जांच की प्रगति रिपोर्ट साझा की। पुलिस ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। मामले में सामने आए विभिन्न बयानों के बीच, कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब एसआईटी की जांच से मिल चुके हैं।एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने विमल कुमार हत्याकांड में SIT द्वारा अब तक किये गये अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट साझा की है। पुलिस ने इस मामले में कई अहम खुलासे किये हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला मौत का राज
मृतक विमल कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जारी कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, चालक द्वारा वाहन से कुचले जाने का दावा और बरामद रॉड से मिली चोटों की रिपोर्ट काफी हद तक मेल खाती है। सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने बताया कि विमल कुमार की मृत्यु कई कठोर और अंदरूनी चोटों के कारण हुई। सिविल सर्जन के अनुसार, मृतक के सिर पर किसी भारी, कुंद वस्तु से जोरदार प्रहार किया गया था, जिससे सिर में गंभीर चोटें आईं। गर्दन की दोनों हड्डियां टूटने के कारण दम घुटने से भी उनकी मृत्यु हो गई। सीने की दोनों ओर की कई पसलियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त थीं, जबकि लिवर भी फट गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि गले का थायरॉयड क्षेत्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त था। फेफड़ों, सीने तथा अन्य महत्वपूर्ण अंगों में गंभीर चोटें पाई गईं। अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण हृदय ने काम करना बंद कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। डॉ. मणिराज रंजन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ड एंड ब्लंट इंजरी की पुष्टि हुई है। मृतक के शरीर पर किसी धारदार हथियार से वार या गोली लगने का कोई निशान नहीं मिला है। हालांकि, शरीर के लगभग सभी प्रमुख अंग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सिर, फेफड़ा, लिवर, सीना और गले में गंभीर चोटें थीं, जो अत्यंत निर्मम हमले की ओर संकेत करती हैं।(एजेंसी )

